PU Special :Couple Reunited-कम पढ़ा-लिखा होने के कारण होते थे विवाद; अब बेरोजगार पति ने हासिल की नौकरी, 9 साल बाद फिर बसेगा घर

शादी के बाद शिक्षा और नौकरी को लेकर विवाद के चलते एक दंपती करीब नौ साल अलग रहा। पत्नी एमकॉम तक पढ़ी हैं, जबकि पति ने परिवार को फिर से जोड़ने के लिए आगे शिक्षा हासिल की और प्राइवेट कंपनी की मैनेजमेंट टीम में नौकरी हासिल की। काउंसलिंग के बाद दोनों ने साथ रहने पर सहमति जताई और रिश्ते को एक और मौका देने का फैसला किया।
Couple Reunited-कम पढ़ा-लिखा होने के कारण होते थे विवाद; अब बेरोजगार पति ने हासिल की नौकरी, 9 साल बाद फिर बसेगा घर

पल्लवी वाघेला, भोपाल। शादी के बाद जब पत्नी को पता चला कि पति उसके मुकाबले कम शिक्षित है और नौकरी नहीं करता, तो उनके बीच शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे रिश्तों में इतनी दूरी ले आया कि पत्नी मायके जाकर रहने लगी। आठ साल तक दोनों अलग-अलग रहे। इस दौरान पति के सामने परिवार को फिर से जोड़ने की चुनौती थी। उसने पत्नी की नाराजगी को अपनी जिंदगी बदलने का लक्ष्य बना लिया। आगे शिक्षा ली, नौकरी हासिल करने के लिए मेहनत की और अब एक प्राइवेट कंपनी की मैनेजमेंट टीम का हिस्सा बन गया है। पति की इस कोशिश और काउंसलिंग के बाद आखिरकार पत्नी भी साथ रहने के लिए तैयार हो गई। शादी के 13 साल बाद और नौ साल की दूरी के बाद अब दोनों ने फिर से साथ जीवन बिताने का फैसला किया है।

पति से विवाद के बाद मायके चली गई थी पत्नी

दंपति की शादी को 13 साल होने वाले हैं और एक बेटा भी है। पत्नी एमकॉम तक पढ़ी हुई हैं और कमाऊ हैं। शादी के बाद जब शिक्षा और नौकरी को लेकर पति से विवाद होने लगे। परिस्थितियां ऐसी बनी कि पत्नी मायके चली गईं और फिर वापस लौटने को तैयार नहीं हुईं। करीब नौ साल तक अलग रहने के दौरान पति ने नौकरी पाने के लिए प्रयास जारी रखे। आखिरकार उसे प्राइवेट कंपनी में मैनेजमेंट टीम में जगह मिल गई।

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रिश्ता बचाने के लिए किया खुद में बदलाव

काउंसलिंग के दौरान पति की कोशिशों को सामने रखते हुए पत्नी को समझाया गया कि पति ने रिश्ते को बचाने के लिए अपनी ओर से बदलाव किया है। अब रिश्ते को एक और मौका देने की जिम्मेदारी दोनों की है। इसके बाद दंपती ने साथ रहने पर सहमति जताई और शपथ पत्र देकर भरोसा दिलाया कि वे अब खुशी-खुशी साथ रहेंगे।

आपसी समझ से निकल सकती है राह

मध्यस्थता केंद्र की निदेशक प्रतिभा राजगोपाल का कहना है कि वैवाहिक रिश्तों में आर्थिक स्थिति, रोजगार और जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद होना असामान्य नहीं है। लेकिन जब शिकायतें लंबे समय तक बनी रहती हैं और बातचीत बंद हो जाती है, तो दूरियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में काउंसलिंग दंपती को एक-दूसरे का पक्ष समझने और विवाद की वजह पहचानने में मदद कर सकती है। रिश्ते को दोबारा मौका देने के लिए दोनों पक्षों की भावनाओं, अपेक्षाओं और प्रयासों को महत्व देना जरूरी है। किसी एक व्यक्ति के बदलने से शुरुआत हो सकती है, लेकिन रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए दोनों की भागीदारी, सम्मान और संवाद जरूरी हैं। साथ रहने का फैसला तभी टिकाऊ बनता है, जब दोनों अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आगे बढ़ें।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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