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मां तेरी ममता न्यारी :नीदरलैंड के भारतवंशी मेयर मां को ढूंढना चाहते, 41 साल पहले शेल्टर होम में मां ने छोड़ा था

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नीदरलैंड के भारतवंशी मेयर मां को ढूंढना चाहते, 41 साल पहले शेल्टर होम में मां ने छोड़ा था
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नागपुर में साल 1985 में एक अविवाहित मां ने अपने महज तीन दिन के नवजात बच्चे को एक शेल्टर होम में छोड़ दिया था। करीब एक महीने बाद नीदरलैंड से भारत घूमने आए एक दंपती ने उस बच्चे को गोद ले लिया और अपने साथ नीदरलैंड ले गए। इस घटना को अब 41 साल बीत चुके हैं। वही बच्चा आज नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम के पास स्थित शहर हीमस्टेड का मेयर बन चुका है। हीमस्टेड के मेयर फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क अब अपनी जन्मदात्री मां की तलाश में हैं।

    अंतिम बार 2025 में भारत आए थे फाल्गुन

    फाल्गुन आखिरी बार दिसंबर 2025 में भारत आए थे, लेकिन उस समय यह बात सार्वजनिक नहीं हुई थी। अब उनकी मां को खोजने की इच्छा सामने आई है। फाल्गुन का कहना है कि वे अपनी मां से सिर्फ एक बार मिलना चाहते हैं।

    फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क कहते हैं—

    “मैंने महाभारत पढ़ी है और मुझे लगता है कि हर कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार है। मैं अपनी मां से केवल एक बार मिलना चाहता हूं और उन्हें यह बताना चाहता हूं कि मुझे बहुत प्यार और सम्मान के साथ पाला गया है।”

    फाल्गुन की यह कहानी न सिर्फ भावुक करने वाली है, बल्कि यह भी दिखाती है कि पहचान और जड़ों की तलाश इंसान के जीवन में कितनी अहम होती है।

    शेल्टर होम में रखा गया ‘फाल्गुन’ नाम

    फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क का जन्म 10 फरवरी 1985 को हुआ था। जन्म के कुछ ही दिनों बाद उनकी मां उन्हें नागपुर स्थित ‘मातृ सेवा संघ’ नाम के शेल्टर होम में छोड़ गई थीं। फाल्गुन करीब एक महीने तक इसी शेल्टर होम में रहे। शेल्टर होम में काम करने वाली एक नर्स ने ही उनका नाम ‘फाल्गुन’ रखा था। दरअसल, हिंदू पंचांग के अनुसार जिस महीने उनका जन्म हुआ, वह फाल्गुन मास था, इसी वजह से नर्स ने उनका नाम फाल्गुन रखा। यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।

    फाल्गुन साल 2025 में तीन बार भारत आए थे। इस दौरान एक अधिकारी की मदद से उन्होंने शेल्टर होम की उस नर्स का पता भी लगाया, जो उनके जन्म के समय वहां कार्यरत थीं। हालांकि, अब वह नर्स रिटायर हो चुकी हैं।

    समाज के डर से फाल्गुन को अविवाहित मां ने छोड़ा था

    नागपुर नगर पालिका आयुक्त अभिजीत चौधरी ने फाल्गुन के जन्म से जुड़े दस्तावेज ढूंढ़ने में मदद की। दस्तावेजों में ये जानकारी सामने आई कि फाल्गुन की मां एक 21 साल की अविवाहिता थी, जो समाज के डर से उनका पालन-पोषण नहीं कर सकती थी। अपनी जड़ों की तलाश में फाल्गुन लगातार प्रयास कर रहे हैं और उनकी यह कहानी संवेदनाओं, पहचान और मानवीय रिश्तों की गहराई को उजागर करती है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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