MP Weather Update :बर्फीली हवाओं से बढ़ी ठिठुरन, 4.6°C तक गिरा पारा; भोपाल-इंदौर समेत कई शहर ठंडे

भोपाल। उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं के चलते मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी का दौर जारी है। प्रदेश के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है, जबकि सुबह और रात के समय घना कोहरा जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, ग्वालियर-चंबल, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में ठंड का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। शहडोल का कल्याणपुर इस सीजन का सबसे ठंडा इलाका रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
उत्तर भारत की बर्फीली हवा से बढ़ी ठिठुरन
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पश्चिम-उत्तर भारत के ऊपर करीब 12.6 किलोमीटर ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम हवाएं लगभग 232 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही हैं। ये हवाएं आसमान में नदी की तरह बहती हैं और इनका सीधा असर मध्य प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है। इसी कारण प्रदेश में रात के तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है और सुबह-शाम ठिठुरन बढ़ गई है।
कहां सबसे ज्यादा ठंड का असर
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में ठंड ज्यादा प्रभावी है। ग्वालियर-चंबल, रीवा, शहडोल, सागर संभाग के साथ-साथ बुंदेलखंड क्षेत्र में भी शीतलहर और सूखी ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शाजापुर में शीतलहर (Cold Wave) चली, जबकि कई जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया रहा।
इन जिलों में पारा 5 डिग्री से नीचे
बुधवार-गुरुवार की रात प्रदेश के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान बेहद कम दर्ज किया गया-
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जिला / स्थान |
न्यूनतम तापमान (°C) |
अधिकतम तापमान (°C) |
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शहडोल (कल्याणपुर) |
4.6 |
— |
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राजगढ़ |
4.5 |
— |
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पचमढ़ी |
3.8 |
22.8 |
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उमरिया |
5.3 |
24.4 |
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मंडला |
5.6 |
26.2 |
|
रीवा |
5.8 |
22.5 |
इन इलाकों में सुबह के समय दृश्यता काफी कम रही, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ।
बड़े शहरों में भी बढ़ी सर्दी
प्रदेश के बड़े शहरों में भी रात का तापमान सामान्य से नीचे चला गया है। इंदौर पांच बड़े शहरों में सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 6 डिग्री, ग्वालियर में 5.9 डिग्री, उज्जैन में 7.5 डिग्री और जबलपुर में 8.8 डिग्री तापमान रहा। इससे पहले नवंबर-दिसंबर की तरह जनवरी में भी ठंड के पुराने रिकॉर्ड टूटते नजर आ रहे हैं।
घना कोहरा बना परेशानी की वजह
शुक्रवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में घना कोहरा छाया रहा। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सागर, शाजापुर, सीहोर, रायसेन, रतलाम और जबलपुर में भी मध्यम कोहरा देखने को मिला। ग्वालियर में विजिबिलिटी घटकर करीब 1000 मीटर रह गई, जिससे वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा।
रेल और सड़क यातायात पर असर
कोहरे की वजह से दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं। मालवा, झेलम और सचखंड एक्सप्रेस सहित एक दर्जन से अधिक ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। सड़कों पर भी वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है, जिससे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग रहा है।
सूखी ठंड से बढ़ी मुश्किलें
टीकमगढ़ और बुंदेलखंड के अन्य जिलों में सूखी ठंड ने लोगों को ज्यादा परेशान किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूखी ठंड शीतलहर और कोहरे वाली ठंड से ज्यादा खतरनाक होती है। इससे शरीर में अकड़न, हाथ-पैर सुन्न होना और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। किसानों और ग्रामीणों को सुबह-सुबह खेतों में काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आगे कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक, 16 जनवरी से सक्रिय रहा पश्चिमी विक्षोभ आगे बढ़ गया है, लेकिन 19 जनवरी से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। यदि यह सिस्टम मजबूत रहा तो 20 जनवरी के बाद मध्य प्रदेश में बादल छाने और कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बन सकती है। हालांकि, तब तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने के आसार कम हैं।
क्यों खास होता है जनवरी का महीना
मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि जैसे मानसून में जुलाई-अगस्त सबसे अहम होते हैं, वैसे ही ठंड के लिहाज से दिसंबर और जनवरी सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं। इन्हीं महीनों में उत्तर भारत से सबसे ज्यादा सर्द हवाएं आती हैं, जिससे तापमान में तेज गिरावट दर्ज होती है। पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी यही ट्रेंड दिखाते हैं।
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