ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम :अमेरिका ने 75 देशों के लिए रोक दी वीजा प्रोसेसिंग, बांग्लादेश समेत भारत के 6 पड़ोसी शामिल

वॉशिंगटन डीसी।
अमेरिका ने क्यों रोकी वीजा प्रोसेसिंग?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि, यह कदम उन आवेदकों को रोकने के लिए उठाया गया है, जो अमेरिका आकर सरकारी मदद या वेलफेयर योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि, कांसुलर अधिकारी और दूतावास अब किसी भी आवेदक को वीजा तभी जारी करें, जब उनकी जांच पूरी तरह से सुरक्षित और दोबारा समीक्षा की गई हो।
भारत के पड़ोसी देशों पर असर
इस लिस्ट में भारत का नाम शामिल नहीं है, लेकिन भारत के 6 पड़ोसी देशों पर इसका असर पड़ेगा:
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देश |
महाद्वीप |
नोट्स |
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अफगानिस्तान |
एशिया |
पहले भी वीज़ा मिलना कठिन था |
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म्यांमार |
एशिया |
दक्षिण-पूर्व एशिया का हिस्सा |
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बांग्लादेश |
एशिया |
पड़ोसी देश, बड़ी आबादी |
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नेपाल |
एशिया |
सीमा पार ट्रैवल प्रभावित होगा |
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भूटान |
एशिया |
वीज़ा प्रोसेसिंग अस्थायी रूप से रोकी जाएगी |
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पाकिस्तान |
एशिया |
लंबे समय से अमेरिका की निगरानी में |
इसके अलावा इस लिस्ट में रूस, ब्राजील, ईरान, सोमालिया, इराक और थाईलैंड जैसे प्रमुख देश भी शामिल हैं।
अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम का हो रहा गलत इस्तेमाल?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि, अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था का गलत इस्तेमाल रोकना आवश्यक है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अमेरिकी जनता के पैसे और संसाधनों का दुरुपयोग न हो। यह फैसला कुछ प्रमुख घटनाओं के बाद आया है-
वॉशिंगटन में गोलीबारी: पिछले महीने, एक अफगान नागरिक ने नेशनल गार्ड के दो जवानों पर हमला किया था।
मिनेसोटा में फ्रॉड: सोमालियाई नागरिकों के कथित बड़े पैमाने पर सरकारी वेलफेयर फ्रॉड पकड़े जाने के बाद प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई।
किस प्रकार का वीजा प्रभावित होगा?
- इस नए आदेश का असर केवल इमिग्रेंट वीजा पर होगा।
- टूरिस्ट वीजा, बिजनेस वीजा और अन्य अस्थायी वीज़ा पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- 2026 में होने वाले फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए आने वाले विदेशी दर्शक इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगे।
- ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि, आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच भी की जाएगी।
75 देशों की लिस्ट
एशिया: अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, कंबोडिया, ईरान, इराक, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कुवैत, किर्गिस्तान, लाओस, लेबनान, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, सीरिया, थाईलैंड, उज्बेकिस्तान, यमन
अफ्रीका: अल्जीरिया, कैमरून, केप वर्डे, कोटे डी आइवर, कांगो, मिस्र, इरिट्रिया, इथियोपिया, गैम्बिया, घाना, गिनी, हैती, लाइबेरिया, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, कांगो गणराज्य, रवांडा, सेनेगल, सिएरा लियोन, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सूडान, तंजानिया, टोगो, ट्यूनीशिया, युगांडा
यूरोप: रूस, अल्बानिया, बेलारूस, बोस्निया, जॉर्जिया, कोसोवो, मैसेडोनिया (नॉर्थ मैसेडोनिया), मोल्दोवा, मोंटेनेग्रो
उत्तर अमेरिका (कैरिबियन सहित): एंटीगुआ और बारबुडा, बहामास, बारबाडोस, बेलीज, क्यूबा, डोमिनिका, ग्रेनाडा, हैती, जमैका, सेंट किट्स और नेविस, सेंट लुसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइन्स
दक्षिण और मध्य अमेरिका: ब्राजील, कोलंबिया, उरुग्वे, ग्वाटेमाला, निकारागुआ
ट्रंप प्रशासन की रणनीति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि, वह गैर-यूरोपीय देशों से होने वाले इमिग्रेशन को कम करना चाहते हैं। सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे देशों के आवेदकों पर नजर रखी जा रही है। स्कैंडिनेवियाई देशों के लोगों को अमेरिका आने में आसानी दी जा रही है। अब तक 1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए जा चुके हैं। पिछले महीने 6,05,000 से ज्यादा लोग देश से निकाले गए, जबकि 25 लाख लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़कर गए।











