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ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान का यू-टर्न :प्रदर्शनकारियों को फांसी देने से पीछे हटी सरकार, बंद किया एयरस्पेस

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बीच बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त धमकियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना से पीछे हटने का संकेत दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि, फांसी देने की कोई योजना नहीं है। इस बीच भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
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प्रदर्शनकारियों को फांसी देने से पीछे हटी सरकार, बंद किया एयरस्पेस
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी/तेहरान। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा और अहम मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनियों, अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवाधिकार संगठनों की लगातार आलोचना के बाद ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने के फैसले से फिलहाल पीछे हटने का संकेत दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि, सरकार की ओर से फांसी देने की कोई योजना नहीं है। 

    ट्रंप की धमकी के बाद बदला ईरान का रुख

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक कार्यक्रम ‘स्पेशल रिपोर्ट विद ब्रेट बेयर’ में कहा कि, फांसी देने की कोई योजना नहीं है। फांसी का सवाल ही नहीं उठता। यह बयान ईरान के पहले के रुख से बिल्कुल अलग है। कुछ दिन पहले ही ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक ट्रायल और जल्द फांसी देने का ऐलान किया था।

    इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था, अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी, तो आप कुछ भयानक होते देखेंगे। वहीं अब ट्रंप ने यह दावा भी किया है कि, उन्हें भरोसेमंद सूत्रों से जानकारी मिली है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं अब रोक दी गई हैं।

    इरफान सुल्तानी केस

    ईरान में 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी का मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहा। इरफान को 8 जनवरी को पश्चिमी तेहरान के फर्दियास इलाके में हुए प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था। 11 जनवरी को उन्हें मौत की सजा सुना दी गई। उन पर ‘मोहरेबेह’ यानी भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया, जो ईरानी कानून में सबसे गंभीर अपराधों में से एक है।

    मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, सुल्तानी को न तो निष्पक्ष ट्रायल मिला न ही वकील या अपील का मौका। उन्हें सरेआम फांसी देने की तैयारी थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद फिलहाल उनकी फांसी टाल दी गई है। हालांकि, अधिकार संगठनों का कहना है कि उनकी जान का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

    ईरान की धमकी और अमेरिका-ईरान तनाव

    हालात तब और गंभीर हो गए जब ईरान के सरकारी टीवी चैनल पर राष्ट्रपति ट्रंप को जान से मारने की धमकी प्रसारित की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह धमकी फारसी भाषा में थी और इसमें 2024 में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया के बटलर में ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की फुटेज दिखाई गई। स्क्रीन पर संदेश था- इस बार गोली निशाने से नहीं चूकेगी।

    इसे ट्रंप के खिलाफ तेहरान की अब तक की सबसे सीधी धमकी माना जा रहा है। इससे पहले भी ट्रंप ईरान को चेतावनी दे चुके हैं कि, अगर वह प्रदर्शनकारियों पर क्रूर कार्रवाई जारी रखता है तो अमेरिका जवाबी कदम उठाएगा।

    ईरान में कितनी भयावह है स्थिति?

    नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) संगठन के अनुसार, अब तक करीब 3,428 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    वहीं ईरान से जुड़ी खबरों को कवर करने वाली एक वेबसाइट का दावा है कि, देशभर में मरने वालों की संख्या 12,000 तक पहुंच सकती है। इनमें से ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं।

    एक अन्य मीडिया रिपोर्ट बताती है कि, चीन के बाद ईरान दुनिया का दूसरा ऐसा देश है, जहां सजा के तौर पर सबसे ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। साल 2025 में ही ईरान में कम से कम 1,500 लोगों को फांसी दी गई थी।

    ईरानी न्यायपालिका का सख्त बयान

    ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने हाल ही में कहा था कि, सजा में देरी का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, अगर हमें कुछ करना है, तो उसे तुरंत करना चाहिए। दो-तीन महीने की देरी से उसका असर खत्म हो जाता है। इस बयान को सरकार की कठोर नीति का संकेत माना गया। हालांकि, बाद में विदेश मंत्री का बयान इससे उलट नजर आया।

    ईरान ने बंद किया एयरस्पेस

    अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और आंतरिक हालात को देखते हुए ईरान ने बुधवार को करीब 2 घंटे के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, नोटिस टू एयरमैन (NOTAM) जारी कर ईरान से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को छोड़कर बाकी उड़ानों पर रोक लगा दी गई। इससे इंडिगो, लुफ्थांसा और एयरोफ्लोट सहित कई एयरलाइंस प्रभावित हुईं।

    भारत समेत कई देशों ने जारी की एडवाइजरी

    ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि, ईरान में रह रहे सभी भारतीय चाहे वे छात्र हों, व्यापारी हों या पर्यटक उन्हें जल्द से जल्द देश छोड़ देना चाहिए।

    एडवाइजरी के मुख्य बिंदु-

    • विरोध-प्रदर्शन और भीड़भाड़ से दूर रहें।
    • भारतीय दूतावास के संपर्क में बने रहें।
    • स्थानीय मीडिया पर नजर रखें।

    ईरान में इस समय 10,000 से ज्यादा भारतीय नागरिक मौजूद हैं। भारत के अलावा स्पेन, इटली और पोलैंड ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है।

    ईरान में क्यों भड़के प्रदर्शन?

    महंगाई और आर्थिक संकट

    28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन सबसे पहले बढ़ती महंगाई और खराब होती अर्थव्यवस्था के खिलाफ थे। रोजमर्रा की वस्तुएं जैसे ब्रेड, चाय और तेल बेहद महंगे हो गए हैं। महंगाई दर 50-70% तक पहुंच चुकी है, जिससे आम जनता की क्रय शक्ति बहुत प्रभावित हुई है।

    मुद्रा का मूल्य गिरना

    ईरानी रियाल का अंतरराष्ट्रीय और ओपन मार्केट में मूल्य ऐतिहासिक रूप से गिर गया। 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 1,455,000 से 1,457,000 रियाल तक पहुंच गई, जिससे विदेशी आयात महंगा हुआ और आर्थिक असंतुलन बढ़ा।

    बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध

    लंबे समय से लागू अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और घरेलू बेरोजगारी के कारण अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है। युवा और मजदूर वर्ग अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जिससे विरोध और तेज हुआ।

    धार्मिक और राजनीतिक असंतोष

    प्रदर्शन धीरे-धीरे धार्मिक और राजनीतिक ढांचे के खिलाफ भी फैल गए। लोग 37 वर्षों से सत्ता में मौजूद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक की पूरी व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं।

    राजशाही और बदलाव की मांग

    कुछ प्रदर्शनकारी पुराने शाह की राजशाही को भी विकल्प के रूप में देखते हैं और राज्य में बदलाव की मांग कर रहे हैं। यह विरोध केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक असंतोष का भी प्रतीक बन गया है। ट्रंप ने भी कहा कि रजा पहलवी उन्हें पसंद हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के भीतर उन्हें कितना समर्थन मिलेगा, यह साफ नहीं है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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