‘बस 5 मिनट और…’ सुबह की नींद क्यों बन जाती है इतनी खास? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक राज

सुबह अलार्म बजते ही आंखें खुलने का नाम नहीं लेतीं। मन करता है कि बस 5 मिनट और सो जाएं, लेकिन यही 5 मिनट कब आधे घंटे में बदल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। वहीं रात को बिस्तर पर जाने के बाद कई लोगों को जल्दी नींद नहीं आती। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या सच में सुबह की नींद रात की नींद से ज्यादा गहरी होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसका जवाब हमारी नींद की प्रक्रिया और शरीर की जैविक घड़ी में छिपा है।
सुबह की नींद ज्यादा गहरी क्यों लगती है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि वैज्ञानिक रूप से सुबह की नींद को रात की नींद से ज्यादा गहरी कहना सही नहीं है। दरअसल, सोते समय हमारा शरीर कई नींद चक्रों से गुजरता है। इन चक्रों में दो मुख्य चरण होते हैं- एनआरईएम नींद और आरईएम नींद। रात के शुरुआती हिस्से में गहरी नींद यानी एन3 चरण ज्यादा होता है। यह नींद का सबसे गहरा चरण माना जाता है। इस दौरान शरीर आराम और रिकवरी की प्रक्रिया में रहता है और व्यक्ति को जगाना भी अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। जैसे-जैसे रात आगे बढ़ती है, गहरी नींद का समय कम होता जाता है और आरईएम नींद का समय बढ़ने लगता है।
आरईएम नींद क्या है?
आरईएम यानी रैपिड आई मूवमेंट नींद, नींद का एक अलग चरण है। इस दौरान आंखों की हलचल तेज हो सकती है और दिमाग काफी सक्रिय रहता है। इसी चरण में आमतौर पर सपने ज्यादा स्पष्ट और लंबे हो सकते हैं। रात के दूसरे हिस्से और सुबह के करीब आरईएम नींद की अवधि बढ़ जाती है। यही कारण है कि सुबह के समय देखे गए सपने कई बार ज्यादा साफ याद रहते हैं। हालांकि आरईएम नींद को गहरी नींद नहीं कहा जाता। यह दिमाग और याददाश्त से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाने वाला अलग नींद चरण है।
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शरीर की जैविक घड़ी भी है जिम्मेदार
हमारे शरीर में करीब 24 घंटे का एक प्राकृतिक चक्र होता है, जिसे जैविक घड़ी कहा जाता है। यह शरीर को बताती है कि कब सोने और कब जागने का समय है। रात में अंधेरा होने पर शरीर में मेलाटोनिन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है। यह शरीर को नींद के लिए तैयार करने में मदद करता है। वहीं सुबह रोशनी बढ़ने पर शरीर धीरे-धीरे जागने की तैयारी शुरू करता है। सुबह के समय कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर भी बढ़ता है, जो शरीर को सक्रिय होने में मदद करता है।
रातभर सोने से कम होता है नींद का दबाव
नींद के पीछे एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया काम करती है, जिसे नींद का दबाव कहा जा सकता है। जब हम लंबे समय तक जागते रहते हैं तो शरीर में सोने की जरूरत बढ़ती जाती है। सोने के बाद यह दबाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसी वजह से रात के शुरुआती हिस्से में शरीर को ज्यादा गहरी नींद मिलती है। सुबह तक नींद का दबाव काफी कम हो चुका होता है और नींद का स्वरूप भी बदल जाता है।
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फिर सुबह उठना इतना मुश्किल क्यों लगता है?
अब सवाल उठता है कि अगर सुबह की नींद सबसे ज्यादा गहरी नहीं होती, तो फिर बिस्तर छोड़ना इतना मुश्किल क्यों लगता है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। सुबह के समय आरईएम नींद के लंबे चरण चल सकते हैं। अगर आपने रात में पर्याप्त नींद नहीं ली है, तो शरीर सुबह भी आराम की मांग कर सकता है। जो लोग रोज देर रात तक जागते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं, उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में छुट्टी के दिन जब वे सुबह देर तक सोते हैं, तो उन्हें यह नींद बेहद आरामदायक और गहरी महसूस हो सकती है।
रात में मोबाइल चलाना भी डाल सकता है असर
देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की तेज रोशनी के संपर्क में रहने से शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। रात में तेज कृत्रिम रोशनी मेलाटोनिन के सामान्य स्तर को प्रभावित कर सकती है, जिससे नींद आने में परेशानी हो सकती है। इसलिए देर रात तक मोबाइल चलाने, देर से सोने और सुबह देर तक सोने की आदत से नींद का पूरा चक्र बिगड़ सकता है।
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क्या सुबह की नींद ज्यादा फायदेमंद है?
सुबह की नींद को रात की नींद से ज्यादा फायदेमंद कहना सही नहीं है। अच्छी नींद के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति को पर्याप्त घंटे की नींद मिले और सोने-जागने का समय नियमित हो। रातभर नींद के अलग-अलग चरण कई बार दोहराए जाते हैं। गहरी नींद शरीर की आराम और रिकवरी के लिए जरूरी है, जबकि आरईएम नींद दिमाग, याददाश्त और मानसिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यहां समझे -
- रात का शुरुआती हिस्सा: गहरी नींद ज्यादा
- रात का दूसरा हिस्सा: आरईएम नींद बढ़ती है
- सुबह के करीब: सपने ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं
- सुबह की रोशनी: शरीर को जागने का संकेत देती है
- कम नींद लेने पर: सुबह उठना ज्यादा मुश्किल लग सकता है
इसलिए अगली बार जब सुबह अलार्म बंद करते हुए लगे कि ‘अभी तो सबसे अच्छी नींद आई थी’, तो समझिए कि इसके पीछे सिर्फ आलस नहीं, बल्कि शरीर की नींद की प्रक्रिया और जैविक घड़ी भी काम कर रही होती है। हालांकि वैज्ञानिक तौर पर सुबह की नींद को रात से ज्यादा गहरी कहना सही नहीं है।












