भोपाल की लोअर लेक में रोज पहुंच रहा 80 लाख लीटर सीवेज, एनजीटी में सुनवाई; 37 नाले किए बंद

भोपाल। इसे रोकने के लिए 10 एमएलडी का नया एसटीपी बनाया जा रहा है, लेकिन इसके दिसंबर 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य है। इस बीच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 31 मार्च 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक की अवधि के लिए निगम पर 2.10 करोड़ रुपए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना की है। यह राशि अभी एनजीटी के अंतिम निर्धारण के अधीन है। एनजीटी में 28 सितंबर को हुई सुनवाई में यह जानकारी सामने आई। निगम ने बताया कि लोअर लेक में पहले मिलने वाले 37 नालों को इंटरसेप्ट कर एसटीपी की ओर मोड़ दिया गया है। रिपोर्ट में इन नालों का कुल अनुमानित प्रवाह 38.7 एमएलडी दर्ज है। इसके बावजूद दो नालों से 8 एमएलडी सीवेज अब भी झील में पहुंच रहा है।
दिसंबर 2027 तक स्थायी इंतजाम
नगर निगम के अनुसार दोनों नालों के सीवेज के उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया जा रहा है। इसका काम 11 सितंबर 2026 को शुरू हुआ है और 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लोअर लेक क्षेत्र में प्रोफेसर कॉलोनी का 2 एमएलडी का एसटीपी पहले से निगम संचालित कर रहा है, जबकि कुछ पंप हाउस पीएचई के पास हैं।
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5 लाख प्रति नाला प्रति माह के हिसाब से गणना
एनजीटी ने 11 अगस्त के आदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निगम की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना करने के निर्देश दिए थे। बोर्ड ने एनजीटी के पुराने आदेशों में तय 5 लाख रुपए प्रति नाला प्रति माह की दर को आधार बनाया। 31 मार्च 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक 21 महीने की अवधि में दो नालों के लिए गणना 2 गुणा 5 लाख गुणा 21 महीने यानी 2.10 करोड़ रुपए हुई। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह गणना अंतिम नहीं है एनजीटी के अंतिम निर्णय और वास्तविक उल्लंघन अवधि की पुष्टि के अधीन है।
अब पीएचई के प्रमुख सचिव को भी देना होगा जवाब
मामले में निगम ने बताया कि सीवेज व्यवस्था और झील के कुछ हिस्सों के रखरखाव में पीएचई की भी भूमिका है। इसके बाद एनजीटी ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव को मामले में पक्षकार बनाया है। उन्हें 15 दिन में जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। निगम से भी 15 दिन में सीवेज रोकने, वेटलैंड की सुरक्षा और अवैध निर्माण पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है।
पेड़ों को नुकसान पर 45 हजार की पेनल्टी
प्रोफेसर कॉलोनी, सिविल लाइंस में रसायन डालकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के मामले में निगम ने संबंधित भूमि मालिक को नोटिस दिया था। जवाब नहीं मिलने पर 45 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई गई। हालांकि 28 सितंबर की सुनवाई में एनजीटी ने कहा कि इस कार्रवाई की रिपोर्ट अभी दाखिल नहीं हुई है। वन विभाग को अगली सुनवाई से पहले जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
वेटलैंड में नए निर्माण का मामला भी एनजीटी के सामने है। आवेदक की ओर से पेश तस्वीरों में ऐसे निर्माण का मुद्दा उठाया गया, जिन्हें वेटलैंड की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है। एनजीटी ने निगम से अवैध-अनधिकृत निर्माण हटाने और वेटलैंड में आगे ऐसे निर्माण रोकने की कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी।




















