मां बनने के बाद थकान, उदासी और वजन में बदलाव? कहीं ये थायरॉयड का संकेत तो नहीं, यहां जानें

डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान हार्मोन में बदलाव, नींद पूरी न होना, बच्चे की देखभाल और शरीर की कमजोरी के कारण थकान, मूड में बदलाव और वजन में उतार-चढ़ाव जैसी परेशानियां होना आम है। लेकिन हर बार इन लक्षणों को सामान्य समझना सही नहीं है। कई महिलाओं में डिलीवरी के बाद पोस्टपार्टम थायरॉयडाइटिस की समस्या हो सकती है। यह एक तरह की थायरॉयड सूजन है, जो बच्चे के जन्म के बाद पहले एक साल के दौरान सामने आ सकती है। इसके लक्षण अक्सर नई मां की सामान्य परेशानियों जैसे ही होते हैं, इसलिए कई बार इसकी पहचान देर से होती है।
क्या है पोस्टपार्टम थायरॉयडाइटिस?
पोस्टपार्टम थायरॉयडाइटिस में डिलीवरी के बाद थायरॉयड ग्लैंड के काम करने के तरीके में बदलाव हो जाता है। आमतौर पर यह समस्या दो चरणों में दिखाई दे सकती है।
पहला चरण- थायरॉयड ज्यादा सक्रिय
शुरुआत में थायरॉयड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लग सकता है। इसे हाइपरथायरॉयडिज्म कहा जाता है।
इस दौरान महिला को:
- दिल की धड़कन तेज महसूस होना
- घबराहट या बेचैनी
- चिड़चिड़ापन
- बिना वजह वजन कम होना
- ज्यादा पसीना आना
- गर्मी ज्यादा लगना
जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
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दूसरा चरण- थायरॉयड धीमा होना
इसके बाद कुछ महिलाओं में थायरॉयड कम सक्रिय हो जाता है। इसे हाइपोथायरॉयडिज्म कहा जाता है।
इस स्थिति में:
- बहुत ज्यादा थकान
- उदासी या डिप्रेशन जैसा महसूस होना
- कब्ज
- त्वचा का रूखा होना
- ठंड ज्यादा लगना
- वजन बढ़ना
- ध्यान लगाने में परेशानी
जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
डिलीवरी के बाद कब कराएं थायरॉयड की जांच?
अगर डिलीवरी के बाद थकान, उदासी, वजन में असामान्य बदलाव या ऊपर बताए गए लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसे सिर्फ डिलीवरी के बाद की कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। डॉक्टर जरूरत के अनुसार TSH और Free T4 जैसे ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में थायरॉयड एंटीबॉडी टेस्ट भी कराया जा सकता है। जांच से पता चलता है कि थायरॉयड सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं।
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किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
कुछ महिलाओं में पोस्टपार्टम थायरॉयडाइटिस का जोखिम ज्यादा हो सकता है। खासकर अगर:
- पहले से थायरॉयड की समस्या रही हो।
- परिवार में थायरॉयड या ऑटोइम्यून बीमारी का इतिहास हो।
- पिछली डिलीवरी के बाद पोस्टपार्टम थायरॉयडाइटिस हो चुकी हो।
- डॉक्टर ने पहले थायरॉयड से जुड़ी कोई समस्या बताई हो।
ऐसी महिलाओं को डिलीवरी के बाद डॉक्टर से थायरॉयड जांच को लेकर जरूर सलाह लेनी चाहिए।
क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इलाज संभव है?
ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं के लिए भी समय पर इलाज जरूरी है। थायरॉयड की दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार कई मामलों में स्तनपान के दौरान इस्तेमाल की जा सकती हैं। हालांकि, दवा की शुरुआत, मात्रा या उसे बंद करने का फैसला खुद से नहीं करना चाहिए। सही इलाज से मां की सेहत और ऊर्जा बेहतर रखने में मदद मिल सकती है, जिससे वह बच्चे की देखभाल और स्तनपान भी अच्छी तरह कर सके।
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हर थकान थायरॉयड नहीं होती
डिलीवरी के बाद थकान और नींद की कमी आम हो सकती है। इसलिए केवल किसी एक लक्षण के आधार पर थायरॉयड की बीमारी मान लेना सही नहीं है। लेकिन अगर कई लक्षण लगातार बने रहें या परेशानी बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इन बातों का रखें ध्यान
डिलीवरी के बाद लगातार थकान + मूड में बदलाव + वजन में असामान्य बदलाव = जांच की जरूरत हो सकती है। समय पर जांच से थायरॉयड की समस्या का पता लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इलाज शुरू किया जा सकता है। इससे नई मां की सेहत को बेहतर रखने में मदद मिलती है।












