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कश्मीर में उगने वाला केसर कोलोराडो के रिसर्चर्स ने छत पर सोलर पैनल्स के नीचे उगाया, हो सकती है 58.5 लाख तक की कमाई

40% ट्रांसपेरेंसी वाले सोलर पैनल के नीचे उगाए गए केसर में बिना छाया वाली छत की तुलना में दोगुने फूल आए, इससे पैदावार भी दोगुनी हुई।  
कश्मीर में उगने वाला केसर कोलोराडो के रिसर्चर्स ने छत पर सोलर पैनल्स के नीचे उगाया, हो सकती है 58.5 लाख तक की कमाई

डेनेवर। यहां के रिसर्चर्स ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो पहले नहीं हुआ। उन्होंने छत पर सोलर पैनल्स की नीचे केसर उगा दिया है। यह साबित करता है कि अच्छी तरह से प्लान किए गए प्रोजेक्ट से कुछ भी पाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने सोलर पैनल वाली छत से बिजली बनाने के साथ-साथ दुनिया का सबसे महंगा मसाला उगा कर अतिरिक्त कमाई भी की है।

ट्रांसपेरेंसी वाले थे सोलर पैनल

कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की रिपोर्ट में सामने आया है कि 40% ट्रांसपेरेंसी वाले सोलर पैनल के नीचे उगाए गए केसर में बिना छाया वाली छत की तुलना में दोगुने फूल आए। इससे सूखे मसाले की पैदावार भी दोगुनी हुई। यह रिसर्च डेनवर में CSU स्पर कैंपस में की गई, जहां जेनिफर बाउसेलोट की टीम सोलर पैनल वाली और बिना सोलर पैनल वाली छतों पर पौधों की स्टडी करती है। बाउसेलोट ने 2007 में ग्रीन रूफ और सोलर पैनल के बीच संबंध की स्टडी शुरू की थी। यहां रिसर्चर्स यह खेजते हैं कि शहरी इलाकों में छतों पर खाना कैसे उगाया जा सकता है।

कैसी स्थितियां रहती हैं छत पर

रिसर्चर्स ऐसे पैनल लगाने की सलाह देते हैं जो 30% से 40% तक ही रोशनी अंदर आने देते हैं। छत पर लगे यह सोलर पैनल उस सतह से 6-8 फीट ऊंचाई पर होते हैं जहां फसल उगानी है। इससे पहले पूर्वी मोरक्को में 2022 में केसर उगाने का प्रयोग किया गया था। इसमें 24 महीनों तक पूरी धूप और तीन अलग-अलग स्तर की छाया में केसर उगाने की कोशिश की गई और परिस्थितियों की तुलना की गई। इसमें पाया गया कि 30% छाया (यानी 70 प्रतिशत धूप) में केसर की पैदावार सबसे ज्यादा हुई। धूप के अलग-अलग प्रतिशत और परिस्थितियां बताती हैं कि इसका कोई एक फॉर्मूला नहीं है।

61 हजार डॉलर तक की कमाई संभव

कोलोराडो की रिसर्च टीम ने 4,356 स्क्वायर फीट की खेती योग्य जगह और 46-किलोवाट क्षमता वाले पहले से लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम को आधार बनाकर पांच साल का मॉडल बनाया है। इस मॉडल के मुताबिक लगभग 61,000 डॉलर यानी करीब 58.5 लाख रुपये की शुद्ध कमाई हो सकती है। इस कमाई में सूखा केसर, बिजली और कॉर्म्स की बिक्री से होने वाला मुनाफा शामिल है। कॉर्म्स जमीन के नीचे उगने वाले वो हिस्से हैं जिनसे नए पौधे तैयार होते हैं। इस बजट में केसर की कीमत 35 डॉलर प्रति ग्राम (करीब 3355 रुपये) और एक कॉर्म की कीमत 25 सेंट (लगभग 24 रुपये) मानी गई है। साथ ही यह भी आंका गया है कि 5 साल में बिजली बेचकर 13,470 डॉलर (लगभग 13 लाख रुपये) तक कमाए जा सकते हैं। हालांकि पहले साल में लागत कमाई से ज्यादा रहेगी और इस अनुमान में नए रूफटॉप सिस्टम को लगाने की लागत नहीं जोड़ी गई है।

मेहनत का काम है केसर निकालना

यूनिवर्सिटी ऑफ वरमोंट के रिसर्चर्स ने पता लगाया कि केसर की कटाई में कितनी मेहनत लगती है। अपने एक्सपेरिमेंट में उन्होंने पाया कि एक ग्राम सूखा केसर पाने के लिए 159 से 179 फूलों की जरूरत होती है। इसी मेहनत की वजह से किचन में रखी केसर की एक छोटी सी डिब्बी इतनी महंगी होती है। खेती में केसर के ज्यादा फूल मिलना कमाई के लिए अच्छी बात है, लेकिन इसे निकालने के लिए ज्यादा फूलों को तोड़ कर प्रॉसेस करना होगा जिसमें एक्स्ट्रा मैनपावर की जरूरत होगी।

शहरों के लिए आकर्षक प्रोजेक्ट

रिसर्चर्स का कहना है कि शहरों के लिए यह प्रोजेक्ट बहुत आकर्षक है। छत पर खेती और सोलर पावर जेनरेशन एक ही जगह पर हो सकते हैं। सोलर पैनल की छाया से फसल को गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। साथ ही सिंचाई की जरूरत भी कम हो सकती है। 

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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