PU Special :मां करने जा रही तीसरी शादी; 11 साल के बच्चे ने कहा-दादा-दादी के साथ ही रहना है, फैमिली कोर्ट ने सौंपी कस्टडी

भोपाल फैमिली कोर्ट ने 11 साल के बच्चे की इच्छा, स्थिरता, शिक्षा और देखभाल को ध्यान में रखते हुए उसकी कस्टडी दादा-दादी को सौंपी है। बच्चे ने मां की दूसरी शादी के बाद नए घर में रहने में असहजता जताई थी। कोर्ट ने मां को नियमित मुलाकात का अधिकार देते हुए दादा-दादी को इसमें बाधा न डालने के निर्देश दिए।
मां करने जा रही तीसरी शादी; 11 साल के बच्चे ने कहा-दादा-दादी के साथ ही रहना है, फैमिली कोर्ट ने सौंपी कस्टडी

पल्लवी वाघेला, भोपाल। मुझे मां के नए घर में अच्छा नहीं लगता था। उनके पति का व्यवहार उनके और मेरे साथ अच्छा नहीं था। इसीलिए मम्मा अब उनसे अलग हो गई हैं, लेकिन उनके नए घर भी मैं जाना नहीं चाहता। मैं दादा-दादी के साथ ही रहना चाहता हूं। 11 साल के बच्चे ने यह गुहार फैमिली कोर्ट में लगाई। मामले में कोर्ट ने बच्चे के हित का ध्यान रखते हुए उसकी कस्टडी दादा-दादी को सौंपी है। वहीं, उन्हें आदेश दिया है कि बच्चे को नियमित रूप से उसकी मां से मिलने दिया जाए और उसमें दादा-दादी किसी तरह का व्यवधान न डालें।

दादा-दादी ने कस्टडी के लिए लगाया था केस

मामले में बच्चे के दादा-दादी ने उसकी कस्टडी के लिए केस लगाया था। सुनवाई के दौरान बच्चे को कोर्ट के सामने पेश किया गया। बच्चे ने बताया कि वह अपने दादा-दादी के साथ खुश है और उनके साथ ही रहना चाहता है। कोर्ट ने यह भी देखा कि पिता की मृत्यु के बाद भी बच्चा लंबे समय तक दादा-दादी के साथ रह रहा था। वहीं, मां की दूसरी शादी में लगातार विवाद के बाद वह अब तीसरी शादी करने जा रही हैं ऐसे में बच्चा उनके साथ नए घर जाने में सहज महसूस नहीं कर रहा था।

कोर्ट ने कहा- सक्षम हैं दादा

मामले में कोर्ट ने दादा की परिस्थितियों को भी देखा। दादा सरकारी कर्मचारी हैं और बच्चे की शिक्षा, स्वास्थ्य और पालन-पोषण के लिए बेहतर व्यवस्था करने की स्थिति में हैं। वहीं, दादी भी अर्ली रिटायरमेंट के बाद अच्छी पेंशन पाती हैं और लंबे समय से बच्चे का ध्यान भी रखती आ रही हैं। कोर्ट ने माना कि बच्चे की इच्छा के साथ उसकी स्थिरता, शिक्षा, सुरक्षा और समुचित देखभाल को भी कस्टडी तय करते समय ध्यान में रखना जरूरी है।
बता दें, मामले में बच्चे ने बताया कि मां की दूसरी शादी के बाद वह उनके साथ नए घर में रहने गया था, लेकिन वहां उसे अच्छा नहीं लगता था। इसके चलते मां ने उसे दोबारा दादी के पास छोड़ दिया था। एक साल पहले मां का तलाक होने के बाद बच्चा कुछ समय मां और कुछ समय दादा-दादी के साथ रहता था। अब मां फिर से शादी करने जा रही है लेकिन बच्चा नए घर जाने के लिए तैयार नहीं है। यही वजह है कि बच्चे की कस्टडी को लेकर विवाद हुआ। हालांकि, कोर्ट ने मां के अधिकार को पूरी तरह खत्म नहीं किया। उसे हर महीने बच्चे से मिलने का अधिकार दिया गया है। दादा को निर्देश दिए गए हैं कि वे मां की मुलाकात में किसी तरह की बाधा न डालें।

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बच्चे का हित ही कस्टडी का आधार

इस  बारे में एडवोकेट सारिका सिंह ने  कहा कि कस्टडी के मामलों में अदालत का मुख्य उद्देश्य यह तय करना होता है कि बच्चे के शारीरिक, मानसिक, शैक्षणिक और भावनात्मक विकास के लिए कौन-सा वातावरण बेहतर है। केवल यह तथ्य कि बच्चा मां या पिता के साथ है, अपने आप में कस्टडी का अंतिम आधार नहीं बनता। बच्चे की उम्र, उसकी इच्छा, अब तक किसके साथ रहा है, उसकी देखभाल कौन बेहतर कर सकता है और उसका भविष्य किस व्यवस्था में ज्यादा सुरक्षित है, इन सभी पहलुओं को देखा जाता है।

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