PU Special :बांटने से बढ़ती हैं खुशियां-अब पितरों के नाम पर सिर्फ भोजन नहीं, बुजुर्गों के साथ समय भी बिता रहे हैं परिवार

भोपाल में पितृपक्ष के दौरान वृद्धाश्रमों में दान-पुण्य की परंपरा का स्वरूप बदल रहा है। भोजन, फल और कपड़ों के साथ परिवार अब बुजुर्गों के साथ समय बिता रहे हैं। किताबें, डायपर, मेडिकल किट और केयर प्रोडक्ट देने के अलावा गेम्स, टेक्नोलॉजी क्लास और नर्मदा स्नान जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं।
बांटने से बढ़ती हैं खुशियां-अब पितरों के नाम पर सिर्फ भोजन नहीं, बुजुर्गों के साथ समय भी बिता रहे हैं परिवार
भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ खुशियां बांटते लोग।

पल्लवी वाघेला, भोपाल। पितृपक्ष में पितरों के निमित्त दान-पुण्य की परंपरा पुरानी है, लेकिन भोपाल के वृद्धाश्रमों में इस बार दान का तरीका बदलता नजर आ रहा है। अब बुजुर्गों को भोजन कराने से आगे बढ़कर परिवार उनके साथ वक्त बिताने पहुंच रहे हैं। उनके साथ बैठकर बातें करने के अलावा गीत संगीत की महफिल, कैरम-शतरंज जैसे इनडोर गेम और टेक्नोलॉजी संबंधी क्लासेस भी प्लान की जा रही हैं। दान में भी बदलाव आया है। मिठाई, फल और कपड़ों के साथ अब बड़े अक्षरों वाली धार्मिक व फिक्शन किताबें, डायपर, मेडिकल किट और स्किन-बॉडी केयर प्रोडक्ट शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा वृद्धजन के लिए शहर के आसपास की ट्रिप प्लान भी की जा रही है। दरअसल, यह बदलाव बुजुर्गों की जरूरतों और उनकी भावनात्मक दुनिया को समझने की कोशिश में भी दिखाई देता है।

वृद्धाश्रम में पहुंचकर बुजुर्गों के साथ अपनापन महसूस  हुआ

बता दें, हर साल की तरह ही इस साल भी वृद्धाश्रमों में खाना खिलाने के लिए बुकिंग पहले से की जा चुकी है। लेकिन इस बार कुछ नए बदलाव भी नजर आ रहे हैं। यहां पहुंचने वाले परिवार पूरा दिन वृद्धजन के साथ बिता रहे हैं। आनंद धाम आश्रम पहुंचे इंजीनियरिंग छात्र रणवीर श्रीवास्तव ने बताया दादी की तिथि पर आश्रम के वृद्धजन के साथ बैठने, उनकी बातें सुनने और उनके अनुभव जानने में बहुत मजा आया। उन्होंने कहा कि दादी के जाने के बाद उनके अनुभव की जो कमी महसूस होती थी और वो अपनापन यहां महसूस हुआ।

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केयर प्रोडक्ट बने उपहार

बुजुर्गों को क्या दिया जाए, इसे लेकर भी परिवारों की सोच में बदलाव नजर आ रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़े अक्षरों वाली धार्मिक और फिक्शन की किताबें दान के विकल्पों में शामिल हो रही हैं। इसके अलावा डायपर, मेडिकल किट और त्वचा व शरीर की देखभाल से जुड़े उत्पाद भी उपयोगी उपहार के रूप में चुने जा रहे हैं। आसरा वृद्ध आश्रम पहुंची अर्चना दीक्षित ने बताया सभी लोग भोजन की ही व्यवस्था करते हैं । हमने सोचा कि बुजुर्गों को बॉडी केयर प्रोडक्ट दिए जाएं हल्की ठंड की शुरुआत भी हो चुकी है ऐसे में मॉइश्चराइजर और स्कीन केयर किट अपने पिताजी की तिथि पर देने वाली हूं।

बुजुर्गों के लिए नर्मदा स्नान की ट्रिप की प्लान करके दी

अपना घर वृद्धाश्रम की माधुरी मिश्रा ने बताया कि एक यजमान ने पितृ पक्ष में बुजुर्गों को नर्मदा स्नान की ट्रिप प्लान करके दी। श्राद्ध के पहले ही दिन आश्रम के बुजुर्गों ने इसका लुत्फ लिया। वहीं, आने वाले परिवार वृद्धजन के साथ उनकी उम्र के मुताबिक के फन गेम प्लान कर रहे हैं ताकि उनके बच्चे और वृद्धाश्रम के बुजुर्ग दोनों इस पल को एंजॉय कर सकें।

यह सकारात्मक, संवेदनशीलता से भरा बदलाव है

आसरा वृद्धाश्रम की केयर टेकर समीना मसीह ने कहा  कि यह एक बेहद खूबसूरत और संवेदनशीलता से भरा बदलाव है। श्राद्ध पक्ष (पितृपक्ष) को पारंपरिक रूप से केवल पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अन्न दान और तर्पण से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब समाज में एक सकारात्मक मानसिक बदलाव आ रहा है। लोग केवल भोजन खिलाने की औपचारिकता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वृद्धाश्रमों में आकर बुजुर्गों के साथ समय बिता रहे हैं और उनके अकेलेपन को दूर कर रहे हैं!

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 यह है स्थिति

आसरा वृद्धाश्रम – 83 बुजुर्ग

अपना घर – 25 बुजुर्ग

आनंद धाम – 23 बुजुर्ग

कमल बसंत – 12 बुजुर्ग

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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