PU Special :पूर्व IAS दिव्या मित्तल को डिप्टी कलेक्टर रहीं निशा बांगरे की सलाह..राजनीति में पढ़ी-लिखी महिलाओं की जरूरत, लेकिन यह राह बहुत कठिन है

यूपी की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफा देकर राजनीति में आने के ऐलान के बीच मप्र की पूर्व डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने उन्हें राजनीति की कठिन राह के लिए तैयार रहने की सलाह दी। पूर्व आईएएस अजीता वाजपेयी पांडे ने भी कहा कि अधिकारियों का राजनीति में आना उनकी व्यक्तिगत पसंद है और इसकी आलोचना नहीं होनी चाहिए।
पूर्व IAS दिव्या मित्तल को डिप्टी कलेक्टर रहीं निशा बांगरे की सलाह..राजनीति में पढ़ी-लिखी महिलाओं की जरूरत, लेकिन यह राह बहुत कठिन है
उप्र की पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल और मप्र की पूर्व डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे।

नरेश भगोरिया, भोपाल। उत्तर प्रदेश की आईएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपना इस्तीफा देने के बाद राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार सुबह से वे सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा हो रही है। राजनीति में ब्यूरोक्रेट्स का आना हमेशा से चर्चा में रहा है। चाहे वे अरविंद केजरीवाल हो या फिर कोई और। मप्र में 2023 के विधानसभा चुनाव के पूर्व अपना इस्तीफा देने वालीं डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे भी राजनीति के माध्यम से जनसेवा  करने की इच्छा रखती थीं,लेकिन उनका अनुभव कटु रहा। पीपुल्स समाचार ने जब निशा बांगरे से बात की तो उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए दिव्या मित्तल को सलाह दी। वहीं पूर्व आईएएस अधिकारी अजीता वाजपेयी पांडे ने कहा कि कोई अधिकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आता है तो उसकी आलोचना नहीं की जानी चाहिए।

प्रशासनिक सर्विस और राजनीति जनसेवा के लिए

पूर्व डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने कहा कि राजनीति के माध्यम से जनसेवा नेक विचार है। अगर पूर्व अधिकारी राजनीति में आते हैं तो अच्छी बात है, क्योंकि प्रशासनिक सेवा और शासन दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं। अधिकारी और राजनेता जनता की जरूरतों, समस्याओं से करीब से देखते हैं और यथासंभव कार्य करते हैं, फिर भी शासन में कुछ ज्यादा अधिकार होते हैं, जिनकी बदौलत जनसेवा के ज्यादा से ज्यादा काम किए जा सकते हैं, बशर्ते इरादे मजबूत हो।  

‘सजावट’ नहीं पूरी भागीदारी होनी चाहिए

निशा बांगरे ने कहा कि देश में नारी शक्ति वंदन बिल पास होने के बाद  राजनीति में पढ़ी लिखी महिलाओं की जरूरत पड़ेगी। किसी भी पार्टी में अब महिलाओं का प्रतिनिधित्व  बढ़ने  वाला है। हालांकि अभी हम देखते हैं कि ज्यादातर महिला पार्षदों, विधायकों की राजनीति उनके पति, भाई या बेटे चलाते हैं। मेरा मानना है कि महिलाएं राजनीति में पूर्ण भागीदारी करें,  सजावट की वस्तु बनकर नहीं रहें।

मेरा अनुभव है…इस राह में बहुत मुश्किलें 

निशा बांगरे ने दिव्या मित्तल को राजनीति में आने की सलाह देते हुए कहा कि मेरी तरफ से बहुत शुभकामनाएं, लेकिन याद रखें कि राजनीति की राह बहुत कठिन है हालांकि यह असंभव नहीं है। समर्पण के साथ काम करने पर सफलता जरूर मिलेगी। 

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निशा बांगरे के साथ क्या हुआ था

डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने राजनीति में आने के लिए 2023 में इस्तीफा दे दिया था। वे जब छतरपुर में डिप्टी कलेक्टर थीं तो जून 2023 में उन्होंने आमला में होने वाले धर्म सम्मेलन के लिए छुट्टी मांगी थी। उन्हें छुट्टी की अनुमति नहीं मिली थी।  इसके बाद उन्होंने 27 जून 2023 को डिप्टी कलेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था।सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था तो  उन्होंने सितंबर-अक्टूबर 2023 में आमला से भोपाल तक न्याय पदयात्रा की थी।

आमला से दावेदारी पर नहीं मिला टिकट

इसके बाद उन्होंने आमला विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन ऐन मौके पर कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया। इससे निशा बांगरे को राजनीति का पहला बड़ा झटका लगा। टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने फिर से प्रशासनिक सेवा में जाने की इच्छा जताई। हालांकि उनकी सर्विस में वापसी का मुद्दा  अभी पेंडिंग है। निशा को उम्मीद है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस पर सकारात्मक निर्णय लेंगे।

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अब खाली समय में पढ़ाई की, बीयू में टॉप किया

नौकरी छोड़ने और चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद निशा बांगरे ने 2025 में बरकतउल्ला विवि से समाजशास्त्र में एमए किया। वे यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं। अभी वे एनएलआईयू से भोपाल के स्लम एरिया पर पीएचडी कर रही हैं। इस दौरान वे दूसरी बार मां बनीं और दूसरे बेटे को जन्म दिया, परिवार की जिम्मेदारी निभाई। हालांकि वे कहती हैं, कि नौकरी में लौटने की राह नहीं मिली तो 2028 में विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। आमला विधानसभा क्षेत्र के धार्मिक, सामाजिक कार्यों में सक्रियता बनाए हुए हैं।

राजनीति जनसेवा ही है, नौकरी छोड़ना हिम्मत की बात : पांडे

इस बारे में पूर्व आईएएस अधिकारी और समाजसेवी अजीता वाजपेयी पांडे का कहना है कि लोग आईएएस में जनसेवा का उद्देश्य लेकर जाते हैं। वे चाहते हैं इसके माध्यम से समाज में बदलाव लाएंगे, लेकिन ये सभी की अपनी पसंद है कि क्या वे अपनी लाइन  चेंज करना चाहे तो कर सकते हैं। कोई पूर्व अधिकारी राजनीति में जाना चाहता है तो उसकी आलोचना नहीं की जानी चाहिए। नौकरी छोड़ना भी बड़ी हिम्मत का काम है। यह तब होता है जब कोई बात हमें पसंद नहीं आती। जब मैं सर्विस में थी तो अक्सर कहती थी कि आईएएस मुझे अपनी कूवत पर  मिली है, उपहार में नहीं, गलत बात हम सहन  नहीं करेंगे। इसलिए राजनीति में कोई अधिकारी जा रही हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। 

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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