PU Special :जबलपुर में प्रदेश की पहली पशु इनफर्टिलिटी लैब तैयार, जांच से पता चलेगी पशुओं में बांझपन की वजह
जबलपुर। महिला गौपालक ज्योति चंद्रवंशी अपनी गाय किशोरी को लेकर इस नई लैब से उम्मीद लगाए बैठी हैं। किशोरी के बार-बार प्रयास और इलाज के बाद भी गाभिन नहीं होने पर अब उसकी वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। लैब में पोर्टेबल अल्ट्रासोनोग्राफी, एलाइजा जांच और भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
किशोरी के मां बनने की उम्मीद से जुड़ी नई लैब
किशोरी मेरे घर ही जन्मी थी, इसलिए वह मेरे लिए सिर्फ गाय नहीं, मेरी बेटी जैसी है। उसे अपने बड़े ही लाड प्यार से पाला है, लेकिन आज तक उसे मां बनते नहीं देख पाई। कई बार कोशिश और इलाज के बाद भी किशोरी गाभिन नहीं हो सकी। अब जब जबलपुर में पशुओं की इनफर्टिलिटी जांच के लिए विशेष लैब शुरू होने जा रही है, तो एक नई उम्मीद जगी है। मैं किशोरी को लेकर वहां जाऊंगी और उस दिन का इंतजार करूंगी, जब वह भी मां बनेगी। यह कहना है महिला गौपालक ज्योति चंद्रवंशी का। किशोरी के मां बनने की उनकी यह उम्मीद अब उस नई लैब से जुड़ गई है, जो जबलपुर में पशुओं के बांझपन की वजह तलाशने के लिए तैयार की गई है।
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प्रदेश की पहली पशु इनफर्टिलिटी लैब तैयार
महिलाओं में इनफर्टिलिटी की वजह पता करने के लिए जिस तरह अलग-अलग जांच की जाती हैं, उसी तरह अब पशुओं में भी बांझपन के कारणों की वैज्ञानिक जांच हो सकेगी। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विवि के अंतर्गत संचालित वेटरनरी कॉलेज में प्रदेश की पहली पशु इनफर्टिलिटी लैब तैयार की गई है। करीब 2 करोड़ 5 लाख रुपए की लागत से बनी इस लैब के लिए मंडी बोर्ड के प्रोजेक्ट के तहत राशि मिली है। फिलहाल उपकरणों का इंस्टालेशन चल रहा है और जल्द ही लैब शुरू होने की उम्मीद है।
5 से 7 प्रतिशत दूध देने वाले पशुओं में बांझपन
गायनोकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश मिश्रा के अनुसार, दूध देने वाले करीब 5 से 7 प्रतिशत पशुओं में बांझपन की समस्या देखने को मिलती है। पशु के बार-बार हीट में आने के बावजूद गाभिन नहीं होने पर पशुपालक को लंबे समय तक इलाज कराना पड़ता है। कई बार समस्या का वास्तविक कारण सामने नहीं आने से उपचार भी प्रभावी नहीं हो पाता। नई लैब में वैज्ञानिक जांच से बांझपन के कारणों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
अल्ट्रासाउंड से एलाइजा जांच तक होगी सुविधा
लैब में पोर्टेबल अल्ट्रासोनोग्राफी से पशुओं के प्रजनन तंत्र की जांच की जाएगी। एलाइजा रीडर के माध्यम से विभिन्न बीमारियों की जांच होगी। इसके अलावा भ्रूण प्रत्यारोपण की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इन जांचों से बांझपन के कारणों की पहचान करने और उसके अनुसार उपचार तय करने में मदद मिलेगी।
पशुपालकों को मिलेगा आधुनिक जांच का लाभ
बार-बार हीट में आने के बावजूद गाभिन नहीं होने वाले पशुओं की जांच होगी और बांझपन के कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान में मदद मिलेगी। प्रजनन संबंधी बीमारियों की आधुनिक जांच एक ही स्थान पर हो सकेगी। भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी तकनीक का लाभ मिलेगा और सही कारण सामने आने से उपचार की दिशा तय करना आसान होगा। इससे पशुपालकों के समय, खर्च और पशु के प्रजनन में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।
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प्रजनन क्षमता में सुधार से आर्थिक नुकसान भी होगा कम
प्रो. मनदीप शर्मा, कुलगुरु, एनडीवीएसयू, जबलपुर ने कहा कि पशुओं में बांझपन की समस्या की समय पर पहचान और उचित उपचार के लिए यह लैब महत्वपूर्ण साबित होगी। आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से पशुओं की प्रजनन संबंधी बीमारियों की जांच में मदद मिलेगी। इससे पशुओं की प्रजनन क्षमता में सुधार के साथ ही पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा। विवि का प्रयास है कि पशु चिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार कर पशुपालकों को इसका लाभ पहुंचाया जाए।






















