NGT का बड़ा फैसला- इंदौर के झालरिया तालाब पर अवैध अतिक्रमण तुरंत हटाने और 50 मीटर बफर जोन बनाने के आदेश

भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल भोपाल स्थित बेंच ने इंदौर जिले के ग्राम झालरिया स्थित प्राकृतिक जल निकायों (तालाबों) के संरक्षण, अवैध अतिक्रमण और सीवेज प्रदूषण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। सुदेश गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने जिला प्रशासन और नगर निगम इंदौर को तालाबों के दायरे से अवैध निर्माण तुरंत हटाने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
बड़े स्थायी ढांचे का अवैध निर्माण
झालरिया तालाब में भारी अतिक्रमण और प्रदूषणसंयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ा झालरिया तालाब (ISRO सूची अनुसार 7.208 हेक्टेयर) के क्षेत्र में श्री अटल धाम राजपूत धर्मशाला नामक एक बड़े स्थायी ढांचे का अवैध निर्माण पाया गया। निर्माण हेतु भूमि को समतल करने के लिए मिट्टी का भराव किया गया और रिटेनिंग दीवार बनाई गई। वहीं, छोटा झालरिया तालाब (3.153 हेक्टेयर) पूरी तरह खरपतवार से ढका हुआ है और उसमें घरेलू सीवेज सीधे बहाया जा रहा है। इसके अलावा, आसपास 'लेक व्यू' आवासीय कॉलोनी का निर्माण भी पाया गया।
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NGT के मुख्य निर्देश
न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 तथा सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं-
50 मीटर नो-कंस्ट्रक्शन जोन
जिला प्रशासन को राजस्व रिकॉर्ड और ISRO आद्रभूमि इन्वेंटरी के आधार पर दोनों तालाबों की सीमा तय कर 'बाउंड्री पिलर' लगाने और 50 मीटर का नो-कंस्ट्रक्शन जोन (बफर जोन) घोषित करने का आदेश दिया गया है।
अवैध निर्माण ढहाने के आदेश
तालाब क्षेत्र और 50 मीटर बफर जोन के भीतर जारी सभी अवैध निर्माणों (जैसे धर्मशाला) को तुरंत रोकने और हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
दोषी अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
आद्रभूमि( वेटलैंड) नियमों का उल्लंघन कर अवैध निर्माण की अनदेखी करने या अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
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सीवेज डाइवर्जन व जल गुणवत्ता मॉनिटरिंग
छोटा तालाब में गिर रहे गंदे पानी को रोकने और ट्रीटमेंट के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तालाब की पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए 'ऑनलाइन कंटीन्यूअस वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम' स्थापित करने को कहा गया है। अधिकरण ने प्रशासन को अगले 15 दिनों के भीतर इस आदेश की पालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का समय दिया है।




















