सड़क की मिट्टी में मिलता है सोना! इस बाजार में लोग धूल बटोरकर करते हैं कमाई

नई दिल्ली। आमतौर पर सड़क पर पड़ी मिट्टी और धूल को लोग बेकार समझते हैं। लेकिन हैदराबाद के एक इलाके में यही धूल कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ महिलाएं सड़क और फुटपाथ से मिट्टी और धूल इकट्ठा करती दिखाई दे रही हैं। दावा है कि इस धूल में सोने और चांदी के बेहद छोटे कण मिले होते हैं, जिन्हें बेचकर कमाई की जाती है। यह मामला हैदराबाद के गुलजार हौज इलाके का बताया जा रहा है। यह जगह चारमीनार के पास है और लंबे समय से सोने-चांदी के कारोबार के लिए जानी जाती है। यहां बड़ी संख्या में ज्वेलरी की दुकानें और काम करने वाली छोटी-बड़ी यूनिट्स हैं।
आखिर सड़क की मिट्टी में सोना आता कहां से है?
गुलजार हौज इलाके में रोजाना सोने-चांदी के आभूषणों की कटाई, घिसाई और पॉलिश का काम होता है। इस दौरान सोने और चांदी के बहुत बारीक कण निकलते हैं। ये कण काम करने वाली जगह की धूल, मिट्टी, नालियों और फुटपाथ के आसपास जमा हो सकते हैं। इसी वजह से कुछ लोग इन जगहों से जमा हुई धूल और मिट्टी को इकट्ठा करते हैं। बाद में इसे ऐसे लोगों को बेचा जाता है जो इस सामग्री को रिफाइन करके उसमें मौजूद कीमती धातुओं के छोटे-छोटे कण अलग करते हैं। यानी यहां सड़क की मिट्टी सीधे सोने में नहीं बदल जाती, बल्कि उसमें मौजूद बेहद महीन कणों को अलग करने के बाद सोना या दूसरी कीमती धातु हासिल होती है।
महिलाएं कैसे इकट्ठा करती हैं मिट्टी?
वायरल वीडियो में महिलाएं सड़क और फुटपाथ की सफाई करती दिखाई दे रही हैं। वे झाड़ू लगाने के साथ लोहे के ब्रश की मदद से पत्थरों और फर्श के बीच फंसी धूल-मिट्टी भी निकालती हैं। इसके बाद इस मिट्टी को एक जगह इकट्ठा किया जाता है। माना जाता है कि लगातार ज्वेलरी का काम होने वाले इलाके में जमा होने वाली धूल में कीमती धातुओं के बारीक कण मिल सकते हैं। हालांकि, इससे यह समझना जरूरी है कि हर सड़क की मिट्टी में सोना नहीं होता। यह तरीका उन्हीं इलाकों में काम का हो सकता है जहां लंबे समय से सोने-चांदी के आभूषण बनाने, काटने या पॉलिश करने का काम बड़े स्तर पर होता है।
10 रुपए या 100 रुपए किलो? कीमत पर अलग-अलग दावे
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इस मिट्टी की कीमत को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर इसे करीब 100 रुपये प्रति किलो तक बिकने की बात कही गई है। हालांकि, वीडियो में सफाई करने वाली कुछ महिलाओं से जब इसकी कीमत पूछी गई तो उन्होंने करीब 10 रुपये प्रति किलो कीमत बताई। ऐसे में इस मिट्टी की वास्तविक कीमत कितनी है, इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं है। इसकी कीमत इलाके, मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद कीमती धातुओं की मात्रा के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए सोशल मीडिया पर बताए जा रहे किसी एक तय भाव को सही मानना ठीक नहीं होगा।
कोलकाता में भी होता है ऐसा काम
सिर्फ हैदराबाद ही नहीं, कोलकाता के बोउबाजार इलाके में भी इसी तरह की प्रक्रिया देखने को मिलती है। बोउबाजार में बड़ी संख्या में ज्वेलरी वर्कशॉप हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, यहां एक समुदाय सुबह के समय गलियों, फुटपाथों और नालियों से धूल और गाद इकट्ठा करता है। इन लोगों को 'नेहारावाला' या 'न्यूआरा' नाम से भी जाना जाता है। इनका काम भी ज्वेलरी बनाने और पॉलिश करने के दौरान निकलने वाले सोने के बेहद छोटे कणों को जमा करने से जुड़ा है। बाद में इस धूल और गाद को प्रोसेस किया जाता है, ताकि उसमें मौजूद कीमती धातुओं को अलग किया जा सके। इस तरह हैदराबाद की सड़क पर दिखाई दे रही मिट्टी सिर्फ सामान्य धूल नहीं है। ज्वेलरी कारोबार वाले इलाके में लंबे समय तक जमा होने वाली धूल में सोने और चांदी के बेहद छोटे कण मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, इसमें कितना सोना निकलेगा और मिट्टी की कीमत कितनी होगी, यह हर जगह और सामग्री के हिसाब से अलग हो सकता है।












