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हनी-मनी मैन: संविदा पर काम कर रहे मेहरा ने अपने यहां रिटायर्ड अफसरों को दे रखी थी नौकरी 

चीफ इंजीनियर की काली कमाई पर अब केंद्रीय जांच एजेंसियों की नजर
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हनी-मनी मैन: संविदा पर काम कर रहे मेहरा ने अपने यहां रिटायर्ड अफसरों को दे रखी थी नौकरी 

राजीव सोनी 
भोपाल। पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर इन चीफ (ईएनसी) पोस्ट से रिटायर होकर मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉपोर्रेशन में संविदा पर तैनात चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा की काली कमाई पर अब आयकर और ईडी ने नजरें गड़ा दी हैं। खुद संविदा पर नौकरी कर रहे इस ‘हनी-मनी मैन’ ने अपने 100 एकड़ के फार्म हाउस पर 5 रिटायर्ड अफसरों को भी नौकरी पर रखा हुआ है। इनमें हार्टीकल्चर, एग्रीकल्चर और मत्स्य विभाग के क्लास-1 स्तर के रिटायर्ड अफसर रहे हैं। छापामारी के 4 दिन बाद भी सरकार ने मेहरा की सेवाओं को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। लोकायुक्त ने पीडब्ल्यूडी से मेहरा के बेटे रोहित द्वारा पाइप और फर्नीचर सप्लाई का डिटेल तलब किया है। 

डेढ़- दो दशक में खड़ा किया अकूत संपत्ति का साम्राज्य

लोकायुक्त और विभागीय सूत्रों का कहना है कि असिस्टेंट इंजीनियर की शुरुआती नौकरी से डेढ़-दो दशक में धनकुबेर बने मेहरा ने वैध-अवैध कमाई से कई स्टार्टअप भी खड़े कर लिए। बेशकीमती जमीनों में निवेश किया और अत्याधुनिक कृषि यंत्रों से हार्टीकल्चर, मत्स्य पालन और खेती-किसानी को लाभ का धंधा बनाकर करोड़ों की कमाई भी की। रिसॉर्ट और उन्नत खेती-किसानी की व्यवस्थित देखरेख के लिए स्किल्ड स्टाफ को नौकरी पर रखा।  

रिकॉर्ड में नहीं मिले पूर्व अफसरों के नाम

लोकायुक्त के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा करीब 15 छोटे-बड़े कर्मचारियों का ब्यौरा मिला है। रिटायर्ड अफसरों के नाम रिकॉर्ड पर नाम नहीं रखे गए। उनकी सेवाएं मॉनीटरिंग के लिए ली गईं। विवेचना के तहत सभी कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। वे कबसे नौकरी पर हैं और उन्हें कितनी सैलरी दी जा रही है, इसका ब्यौरा भी तलब किया गया है। प्रॉपर्टी का शुरूआती आकलन अभी 25-30 करोड़ का किया जा रहा है।  

आईटी और ईडी ने गड़ाई नजरें 

लोकायुक्त पुलिस अभी इस 'हनी-मनी मैन' के ठिकानों से मिली अकूत संपदा और निवेश संबंधी मिल्कियत की कुल मार्केट वैल्यू निकालने में जुटी है। वहीं दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) और आयकर विभाग की इन्वेस्टीगेशन और खुफिया विंग ने भी इस चौंकाने वाली कार्रवाई पर अपनी नजरें जमा दी हैं। जांच एजेंसियां अनौपचारिक तौर पर जानकारियां साझा करती ही हैं। ये केंद्रीय एजेंसी अपने एक्शन के लिए लोकायुक्त की चालानी कार्रवाई और अप्रैजल रिपोर्ट के इंतजार में हैं।

कार्रवाई से कई लोगों की उड़ी नींद 

साल  2006 के बाद से मेहरा के सितारों ने बुलंदी पकड़ ली। कई बड़े अफसर और रसूखदारों का उसे वरदहस्त मिल गया। कार्रवाई से कई पूर्व और मौजूदा अफसरों नीदें उड़ी हुई हैं। करोड़ों की अनुपातहीन संपत्ति के अटैचमेंट को लेकर ऊहापोह बना हुआ है। छापेमारी के 4 दिन बाद भी मेहरा की संविदा नियुक्ति यथावत बनी हुई है।

People's Reporter
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