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Putin's India Visit : रशिया से आया मेरा दोस्त...

भारत के पुराने मित्र देश रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिन की यात्रा पर दिल्ली पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट पहुंचकर पुतिन का स्वागत किया। पढ़िए पुतिन की इस यात्रा पर पीपुल्स समाचार के स्टेट एडिटर मनीष दीक्षित का नजरिया...
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 रशिया से आया मेरा दोस्त...
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भारत के पुराने मित्र देश रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय दौरे पर शाम 7 बजे के भारत पहुंच गए हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत कर दुनिया को यह संदेश दे दिया है की वे भी कूटनीति में किसी से कम नहीं है | पुतिन भारत में करीब 30 घंटे तक रहेंगे | इस दौरान रक्षा समेत कई महत्वपूर्ण समझौंतों पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं | दोनों नेताओं की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन पहली बार भारत की सरजमीं पर आ रहे है।

    वाशिंगटन के लिए कूटनीतिक इशारा

    अमेरिका ने हाल ही में जिस तरह से टैरिफ के जरिए भारत के ऊपर दबाव बनाने की कोशिश की है, उसे लेकर यह मुलाकात वाशिंगटन के लिए एक कूटनीतिक इशारा माना जा है। इससे यह संकेत भी मिलते है की भारत अमेरिका के दबाव में  एक हद के बाद नहीं झुकेगा और ना ही नई दिल्ली अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता करेगी। पुतिन की इस यात्रा का मकसद भारत-रूस सामरिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है, जब भारत के अमेरिका के साथ संबंधों में कुछ गिरावट आई है।

    भारत अपने पक्ष को लेकर स्पष्ट

    एक तरफ, यूक्रेन के साथ युद्ध की वजह से अमेरिका और यूरोपीय देश रूस से व्यापार रोकने के लिए भारत पर लगातार दबाव बना रहे हैं। ताजा उदाहरण में ट्रंप की टैरिफ नीति है। अमेरिका भारत पर मनमाने टैरिफ लगाकर उस पर रूस से ऊर्जा निर्भरता को कम करने के लिए लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है | रशिया से भारत आने वाले सस्ते तेल पर भी अमेरिका ने कैंची चलाई है |  हालांकि, भारत ने अपना पक्ष साफ रखा कि वह अपने देश और यहां की जनता के हित पहले देखेगी। तमाम दबावों के बीच भारत ने अमेरिका के साथ अपने सैन्य समझौते जारी रखे हुए हैं। इसके अलावा भारत और रूस के बीच रक्षा समझौता काफी मजबूत है, जो पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय है।

    दूसरे देश नहीं बता सकते हमें क्या करना है

    दरअसल यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी पूरी तरह से रूस और पुतिन का विरोध कर रहे हैं। इस वजह से भारत में पुतिन और मोदी की इस मुलाकात से यूरोपीय देशों और खासकर अमेरिका को मिर्ची लगनी तय है। जिस तरह से अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस के साथ व्यापारिक संबंध खत्म करने का दबाव बनाया, इसे देखते हुए पुतिन का ये दौरा इस बात का संकेत है कि भारत अपनी नीतियों पर निर्णय खुद लेने में सक्षम है। दूसरे देश भारत को नहीं बता सकते कि उसे क्या करना है। हालांकि, चीन और रूस के बीच के संबंध काफी अच्छे हैं। चीन ने पुतिन और मोदी की इस मुलाकात पर नजर बनाए हुए है। चीनी और अमेरिकी मीडिया में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात की जोरशोर से चर्चा हो रही है। अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय इस दौरे के मकसद, संभावित समझौतों के मायने और व्हाइट हाउस की राजनीतिक प्रतिक्रिया पर खास नजर रखेगी। वॉशिंगटन खास तौर पर समिट की दो बातों पर नजर रखेगा | पहला - पुतिन को दिए जाने वाले सेरेमोनियल ट्रीटमेंट का लेवल और दूसरा- डिफेंस और एनर्जी पर फाइनल परिणाम। अमेरिकी विशेषज्ञ यह देखेंगे कि कौन से सुरक्षा समझौते पर डील पक्की हुई है।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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