मप्र में ठंड ने फिर जोर पकड़ा, इंदौर- ग्वालियर-जबलपुर में छाया कोहरा

10 जनवरी के बाद बूंदाबांदी के आसार, पारे में लगातार गिरावट
मप्र में ठंड ने फिर जोर पकड़ा, इंदौर- ग्वालियर-जबलपुर में छाया कोहरा

इंदौर। मध्य प्रदेश में ठंड का दूसरा दौर शुरू हो गया है। ग्वालियर- चंबल, जबलपुर, इंदौर, रीवा सहित प्रदेश के कई जिलों में कोहरे का असर दिखने लगा है। दिन-रात के तापमान में गिरावट होने लगी है। 10 जनवरी के बाद बूंदाबांदी की भी संभावना मौसम विभाग ने जताई है। इंदौर में मंगलवार सुबह से शहर में कोहरा छाया रहा। जिसकी दृश्यता 400 मीटर तक थी। कोहरे के कारण वाहन चालकों को स्ट्रीट लाइट का सहारा लेना पड़ रहा है।

पिछले 24 घंटे में दिन के तापमान में 8 डिग्री की गिरावट आई है, वहीं सामान्य से 4 डिग्री कम है। इंदौर में दोपहर 12 बजे के बाद तेज धूप निकली। बर्फीली हवाओं के कारण अधिकतम तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। मौसम विभाग के अनुसार सर्द हवाएं प्रदेश में आ रही हैं। इसी के असर से एक बार फिर ठंड ने दस्तक दी है।

जबलपुर में भी कोहरे के साथ चली शीतलहर

जिले में मंगलवार की सुबह से लेकर दिन भर शीतलहर चली। रात की तुलना में दिन में अधिक ठंड का सामना करना पड़ा। अधिकतम तापमान एक ही दिन में 7 डिग्री तक नीचे जाने से यह स्थिति निर्मित हुई। सुबह कोहरा भी जमकर छाया रहा जिसके चलते आवाजाही में वाहनों को दिक्कत रही। मंगलवार को अधिकतम तापमान 21.4 डिग्री रहा, जो कि सामान्य से 3 डिग्री कम था। मौसम शुष्क रहने की संभावना बताई गई है।

ग्वालियर सहित चंबल अंचल कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में

नए साल की शुरुआत से ही ग्वालियर सहित समूचा चंबल अंचल कड़ाके की ठंड की गिरफ्त में है। तीन दिन से ग्वालियर का न्यूनतम तापमान 9-10 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, लेकिन उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण आमजन की दिनचर्या बिगड़ गई है। साथ ही 4-5 दिन से सुबह घने कोहरे के कारण लोग घरों में बंद रहने के बावजूद कंपकंपा रहे हैं। दोपहर 12 बजे के आसपास निकल रही धूप भी राहत नहीं दे पा रही। भले ही इस सर्दी से फसलों को लाभ है, लेकिन जनमानस बेहाल है। 2 जनवरी को नए साल में सबसे कम तापतान 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। मंगलवार को रात का पारा 9.7 डिग्री सेल्सियस रहा। गौरतलब है कि इस सीजन में 12 दिसंबर को सबसे कम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस रह चुका है। जनवरी में भले ही पारा बहुत नीचे नहीं गया, लेकिन शीतलहर ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रखा है। माना जा रहा है कि मकर संक्रांति तक ऐसी ही सर्दी पड़ सकती है।

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