अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश की सर्वाधिक कमाऊ सड़क इस समय फटेहाल स्थिति में है। जी हां, हम बात कर रहे हैं भोपाल-देवास सड़क की...। रोज 70 से 80 लाख रुपए का टोल वसूलने वाली इस सड़क पर गड्ढों की भरमार तो है ही, साथ ही धूल और गिट्टियां उखड़ने से वाहन स्लिप हो रहे हैं। सड़कों के दोनों किनारों पर शोल्डर नहीं होने से कीचड़ भी फैला हुआ है। इसकी वजह से कई बार वाहनों के टायर इसमें धंसकर हादसे के शिकार हो रहे हैं। इतनी कमाई करने के बाद भी इस रोड की कर्ताधर्ता भोपाल-देवास कॉरिडोर लिमिटेड कंपनी ने पिछले दो तीन सालों से इसका मेंटेनेंस भी नहीं किया है। इसके चलते रोड की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। इसी को लेकर मप्र रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) ने भोपाल-देवास कॉरिडोर लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। उससे इस संबंध में जवाब मांगते हुए जल्द से जल्द इसे दुरुस्त करने और सड़कों के किनारे दोनों मिट्टी की जगह शोल्डर डालने के लिए कहा है।
आष्टा के आगे लसूड़िया परिहार जोड़ के पास भोपाल-देवास रोड की हालत बहुत खराब है। यहां पर रोड के बीचोंबीच डामर-गिट्टी उखड़ने से बीच में लंबी-लंबी पट्टियां बन गई हैं। यहां के ग्रामीण रामलखन ने बताया कि कई सालों से इस सड़क की मरम्मत नहीं हुई। इससे दोपहिया वाहन सवार बीच में बनी इन लाइनों में फंसकर वाहन से गिर रहे हैं। इसके अलावा कई वाहन चालक अपनी साइड छोड़कर दूसरी तरफ आ जाते हैं। रमेश मेवाड़ा ने बताया कि बारिश में रोड पर पानी भरने से गड्ढे नहीं दिखे जिससे कई लोग गिरकर घायल हुए। सड़क किनारे मिट्टी के ढेर बहुत हैं, जिससे साइड में चलने वाले वाहन भी इसमें फंस रहे हैं। सीहोर निवासी प्रताप सिंह बुंदेला ने कहा, मेरा इंदौर-भोपाल में हर दो-तीन दिन में जाना होता है। सड़क का हाल खराब है जबकि इसमें अन्य स्टेट हाइवे से ज्यादा टोल वसूली होती है।
रिकॉर्ड के अनुसार भोपाल-देवास रोड का जिम्मा संभालने वाली कंपनी 70 से 80 लाख रुपए प्रतिदिन का हिसाब किताब एमपीआरडीसी को देती है। दूसरे नंबर पर लेवड़-जावरा है, यहां 18 करोड़ रुपए हर माह टोल वसूली होती है और तीसरे नंबर पर जावरा-नयागांव है, जहां 17 करोड़ रुपए हर माह वसूली होती है। एमपीआरडीसी का कहना है कि हर 6 साल में कंपनी को रिन्यूवल करना था। कंपनी ने इसका भी पालन नहीं किया है। 11 ब्लैक स्पॉट समाप्त करने पर भी कंपनी ने काम नहीं किया। कंपनी के पास 2033 तक का ठेका है।
एपीआरडीसी के एमडी भरत यादव का कहना है कि कंपनी सड़क का ठीक रख-रखाव नहीं कर रही है। सड़क जगह-जगह उखड़ गई हैं। इसके अलावा साइनेज नहीं बनाए गए। ब्लैक स्पॉट समाप्त करने पर भी काम नहीं किया गया है। कंपनी अगर रोड दुरुस्त नहीं करती है तो ठेका टर्मिनेट होगा। फिलहाल नोटिस दिया है। भोपाल-देवास कॉरिडोर लिमिटेड के मैनेजर अजय मिश्रा कहते हैं कि बारिश के बाद रोड के मेंटेनेंस का काम हो रहा है। ब्लैक स्पॉट समाप्त करने के लिए कुछ फ्लाईओवर बनाने के प्रस्ताव एमपीआरडीसी को दिए गए हैं। साइनेज भी बनाए गए हैं।