Naresh Bhagoria
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Manisha Dhanwani
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2 Feb 2026
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 34 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। इन नक्सलियों पर कुल 84 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में 7 महिलाएं और 27 पुरुष शामिल हैं। सभी ने बीजापुर के पुलिस अधीक्षक के सामने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में डिविजनल कमेटी मेंबर, केरलापाल एरिया कमेटी के सदस्य, PLGA, मिलिशिया के सदस्य और कमांडर शामिल हैं। यह सभी अलग-अलग स्तर पर नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह साबित कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास हिंसा से ज्यादा प्रभावी हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण सिर्फ हथियार छोड़ने का नहीं, बल्कि डर से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ने का फैसला है।
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने अन्य नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति काफी आकर्षक है और नक्सलियों के परिवार भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं।
1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 824 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 1079 नक्सली गिरफ्तार किए गए, 220 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए।
इससे पहले छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर सक्रिय 15 नक्सलियों ने कांकेर और गढ़चिरौली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। इन पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित था।
लगातार हो रहे आत्मसमर्पण से साफ है कि सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों की अपील का असर दिख रहा है। नक्सली अब हिंसा छोड़कर शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन की ओर लौट रहे हैं।