छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शुक्रवार को दो महिलाओं समेत चार माओवादियों ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की ‘पूना मार्गेम’ (पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण) योजना के तहत हुआ।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी दक्षिण बस्तर डिवीजन की किस्ताराम एरिया कमेटी से जुड़े थे। इनमें से-
माओवादीयों ने बताया कि वे राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित थे।
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने पुलिस को ये हथियार सौंपे-
साथ ही भारी मात्रा में गोला-बारूद भी पुलिस को दिया गया।
हाल के दिनों में माओवादियों के आत्मसमर्पण की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। 15 जनवरी को बीजापुर जिले में 52 माओवादी मुख्यधारा में शामिल हुए थे। 2025 में राज्य में 1,500 से अधिक माओवादी सक्रिय संगठन छोड़ चुके हैं। केंद्र सरकार ने इस साल 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया है।
किस्ताराम और गोलापल्ली क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैम्प, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों के कारण माओवादियों का स्वतंत्र क्षेत्र सिकुड़ गया है। विकास योजनाओं और सरकारी सुविधाओं की पहुंच ने स्थानीय जनता का भरोसा शासन पर बढ़ाया। यही कारण है कि माओवादी संगठन में तेजी से मोहभंग बढ़ रहा है।
पुलिस ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं प्राप्त करेंगे, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर ‘पूना मार्गेम’ अभियान के तहत आत्मसमर्पण करें और समाज की मुख्यधारा में लौटें।