Naresh Bhagoria
3 Feb 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ में साय सरकार की नई आबकारी नीति ने शराब के शौकीनों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। 30 जनवरी 2026 को राजपत्र में प्रकाशित नई अधिसूचना के मुताबिक, राज्य में देसी-विदेशी शराब, बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पहले से कहीं ज्यादा महंगे होने वाले हैं। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी, लेकिन इसके असर की गूंज अभी से सुनाई देने लगी है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब पर लगने वाली काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) और आबकारी शुल्क की दरों में बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत शराब पर टैक्स अब उसकी रिटेल सेल प्राइस (RSP) यानी बाजार में बिकने वाली कीमत के आधार पर लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि, जितनी महंगी शराब, उतना ज्यादा टैक्स और उतनी ही ज्यादा कीमत।

नई अधिसूचना के अनुसार, देसी शराब की लैंडिंग प्राइस पर 50 प्रतिशत काउंटरवेलिंग ड्यूटी लागू की गई है, जबकि विदेशी शराब (स्पिरिट और वाइन) पर भी 50 प्रतिशत तक ड्यूटी तय की गई है। इसका सबसे ज्यादा असर प्रीमियम और हाई-एंड ब्रांड्स पर पड़ेगा। इस बदलाव के बाद आम उपभोक्ता से लेकर लग्जरी ब्रांड खरीदने वालों तक, सभी की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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क्रम |
मूल्य सीमा (₹) |
शुल्क (₹ प्रति प्रूफ लीटर) |
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1 |
₹900 तक |
475 |
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2 |
₹901 - ₹1250 |
675 |
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3 |
₹1251 - ₹1850 |
805 |
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4 |
₹1851 - ₹2400 |
970 |
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5 |
₹2401 - ₹3500 |
1090 |
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6 |
₹3501 - ₹4500 |
1155 |
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7 |
₹4501 - ₹6500 |
1210 |
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8 |
₹6501 - ₹8500 |
1280 |
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9 |
₹8501 - ₹11,000 |
1335 |
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10 |
₹11,001 से अधिक |
1400 |
सरकार की नई नीति का सीधा असर यह होगा कि प्रीमियम और विदेशी ब्रांड आम लोगों की पहुंच से और दूर हो जाएंगे। RSP आधारित टैक्स सिस्टम में जैसे-जैसे शराब की कीमत बढ़ेगी, टैक्स भी उसी अनुपात में बढ़ता जाएगा।

नई आबकारी नीति में सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि बीयर और RTD ड्रिंक्स को भी महंगा कर दिया गया है।
बीयर पर नई ड्यूटी
रेडी-टू-ड्रिंक (RTD)

नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब छत्तीसगढ़ की सरकारी शराब दुकानों में कांच की जगह प्लास्टिक बोतल में शराब बेची जाएगी।
सरकार का तर्क:
हालांकि, बढ़े टैक्स के चलते उपभोक्ताओं को इसका सीधा फायदा मिलता नहीं दिख रहा।
प्रूफ लीटर शराब में मौजूद शुद्ध अल्कोहल की मात्रा को मापने की इकाई है।
उदाहरण:
टैक्स अब बोतल की मात्रा पर नहीं, बल्कि अल्कोहल कंटेंट पर लगेगा।
नई आबकारी नीति के तहत अब शराब पर टैक्स उसकी खुदरा बिक्री कीमत यानी RSP (Retail Sale Price) के आधार पर लगाया जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि प्रीमियम और महंगे ब्रांड सबसे ज्यादा महंगे हो जाएंगे। बीयर पर टैक्स उसकी खुदरा कीमत पर नहीं, बल्कि डिस्टिलरी से निकलने वाली प्रति बल्क लीटर कीमत के आधार पर लगेगा। इसके अलावा रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) और लो-अल्कोहल ड्रिंक्स भी इस नई व्यवस्था के तहत महंगे होंगे। हालांकि कुछ विशेष मामलों में सेना, अर्धसैनिक बलों और क्लबों के लिए कम टैक्स दरें तय की गई हैं।
हालांकि, नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी, लेकिन इसके पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे आम जनता पर बोझ बता रहा है, जबकि सरकार इसे राजस्व बढ़ाने और सिस्टम सुधारने का कदम बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सड़क से सदन तक गूंज सकता है।
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