बर्बादी से कैसे उबरेंगे अफीम किसान!उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पहुंचे खेतों में और देखी अफीम फसल की बर्बादी

फसल बीमा के दायरे में अफीम फसल नहीं आने से मंदसौर, नीमच और रतलाम जिले के किसानों ने राज्य सरकार से लगाई मुआवजे की गुहार 
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उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पहुंचे खेतों में और देखी अफीम फसल की बर्बादी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। ओलावृष्टि और बारिश से बर्बाद हुई अफीम की फसलों का जायजा लेने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर, चंद्रपुर, खेजड़ी, कित्तुखेड़ी, गोपालपुरा, लोहाखेड़ा, झारड़ा एवं अड़मालिया के खेतों में पहुंचे। यहां किसानों से बात की और शीघ्र सर्वे कराने का भरोसा दिलाया। ज्ञात हो कि मंदसौर जिले के साथ ही नीमच और रतलाम में 30 से 35 प्रतिशत अफीम फसल बर्बाद हो चुकी है। ऐसे में अफीम खेती के लिए केंद्र से मिलने वाले पट्टे के रीन्यूअल और मुआवजे के लिए किसान परेशान है।

    निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने किसानों से कहा कि सरकार सभी प्रभावित क्षेत्रों के हर खेत पर जाकर सर्वे किया जाएगा, इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी खेतों तक पहुंच कर वास्तविक स्थिति का आंकलन कर रहे हैं। अफीम खेती के संबंध में नारकोटिस विभाग भी मौके पर जाकर खेतों का निरीक्षण करेंगे। साथ ही केन्द्र सरकार से चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। फसल बीमा के मामले में भी किसानों को अफीम के अलावा अन्य फसलों के नुकसान की भरपाई की जाएगी। निरीक्षण दौरान जिला योजना समिति के सदस्य राजेश दीक्षित सहित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

    ओलावृष्टि से अफीम के साथ ही सारी फसलें हो चुकी है बर्बाद

    ओलावृष्टि से अफीम, चना, गेहूं, चिया, जौ, लहसुन, प्याज, सरसों, मैथी, अलसी, मसुर और किनोवा जैसी प्रमुख फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई है। खासकर भंवरसा, कचोली, खेताखेड़ा, केलू खेड़ा, बामणिया, पलसोड़ा, पीपला व्यास, मेल्की मेवाड़, हरकीया खाल, कोटडी ईस्ट मुरार, विषन्या और दीपू खेड़ी सहित कई गांव में इस आपदा से प्रभावित हुए। खेतों में काटने लायक कुछ भी नहीं बचा। मंदसौर के इसी इलाके में लगभग डेढ़ सौ हेक्टेयर अफीम कीमत करीब 40 करोड रुपए की नष्ट हो चुकी है। वहीं नीमच जिले की जावद तहसील के मोरवन, सकतपुरिया, चडोल और दरौली सहित  आसपास के गांव में अफीम सहित सभी फसल नष्ट हो गई है। इससे सिर्फ अफीम की करीब 10 करोड रुपए की फसल बर्बाद हो गई है। वहीं मनासा तहसील में गांव गोपावास, आकली, तुमड़ा, रूपवास, सोजावास में अफीम की 10 करोड रुपए की फसल नष्ट हो चुकी है। 

    नष्टीकरण के लिए नारकोटिक्स टीम का इंतजार कर रहे किसान

    ओला और बारिश से बर्बाद हो चुकी अफीम की फसल का सर्वे करके मौके पर ही नष्टीकरण किया जाता है, जिसके केंद्रीय नारकोटिक्स की टीम आती है। इसके लिए किसान लगातार नीमच स्थित नारकोटिक्स कार्यालय में सूचना दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि  अगर उनकी खराब हो चुकी फसल का सर्वे होकर मौके पर नष्टीकरण हो जाएगा तो पट्टा नवीनीकरण में आसानी रहेगी। इसके साथ ही खेतों की सफाई करके दूसरी फसल बोई जा सकेगी। ज्ञात हो कि इस वर्ष मंदसौर, नीमच और रतलाम जिले में करीब 52 से 54 हजार पट्टे जारी किए गए हैं।

     ग्राम कितुखेड़ी में शाम 6 बजे तेज बारिश के साथ औलावृष्टि हुई

     झारठा में भी शाम 6 बजे के करीब मौसम की मार देखने को मिली बारिश से मिनटों में सड़कें पानी से भर गई इस दौरान औलावृष्टि भी देखी गई

    किसानों की पोस्ता पर टिकी मकान और शादी की आस भी टूटी 

    मंदसौर के गांव नावनखेड़ी के धनराज पाटीदार, बूढ़ा गांव के दिलीप पाटीदार, निरधारी गांव के संजय पाटीदार, नीमच के भंवरसा गांव के मुकेश पाटीदार के अनुसार अफीम फसल का वास्तविक लाभ पोस्ता होता है। जहां अफीम 7 से 8 हजार रुपए किलो पर बिकती है, वहीं पोस्ता दाना 1200 रुपए किलो के भाव आसानी से बिकता है। ऐसे में अफीम फसल नष्ट हो जाने से जहां खेती की लागत वसूली नहीं हो सकेगी, वहीं पोस्ता दाने की बिक्री के बाद मिलने वाले पैसे से मकान मरम्मत और बेटे-बेटियों के शादी के सपने चकनाचूर हो गए हैं। 

    Vijay S. Gaur
    By Vijay S. Gaur

    विजय एस. गौर, पीपुल्स समाचार में रीजनल एडीटर हैं। साथ ही राजनीति, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, खेती-किसानी,...Read More

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