BSP लोहा चोरी मामले में 3,959 कॉल ने खोली रैकेट की कड़ी, संजय-अमित के बीच 840 बार हुई बातचीत

दुर्ग भिलाई: भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से करीब 250 टन लोहा स्क्रैप चोरी के मामले में पुलिस जांच अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के जरिए आगे बढ़ रही है। 1 जनवरी से 26 मई 2026 के बीच आरोपियों के बीच 3,959 बार बातचीत का रिकॉर्ड सामने आया है। इनमें संजय सिंह और अमित शर्मा के बीच सबसे ज्यादा 840 कॉल दर्ज हैं। पुलिस इन कॉल पैटर्न, टावर लोकेशन और घटनास्थल के नजरी नक्शे को जोड़कर कथित स्क्रैप चोरी नेटवर्क की भूमिका और गतिविधियों की जांच कर रही है।
3,959 कॉल बनीं जांच की सबसे अहम कड़ी
पुलिस के हाथ लगे CDR में 1 जनवरी से 26 मई 2026 के बीच आरोपियों के बीच कुल 3,959 बार बातचीत दर्ज हुई है। जांच में सामने आया कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ था। सबसे ज्यादा 840 कॉल संजय सिंह और अमित शर्मा के बीच हुईं। इसके बाद अमित शर्मा और मिथेन के बीच 823, संजय सिंह और मिथेन के बीच 668 तथा घनश्याम और चितानंद के बीच 657 बार बातचीत दर्ज की गई।
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840 कॉल ने बढ़ाया संजय-अमित कनेक्शन पर फोकस
जांच में संजय सिंह और अमित शर्मा के बीच हुई 840 बातचीत को अहम माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संख्या में हुई बातचीत का संबंध ट्रकों की आवाजाही, स्क्रैप की लोडिंग, वजन और प्लांट से माल बाहर निकालने की गतिविधियों से था या नहीं। CDR को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखा जा रहा है।
30 से 40 ट्रिप का दावा, अकलोरडीह में जमा होता था स्क्रैप
पुलिस के अनुसार, संजय सिंह के कथित कबूलनामे में मार्च से जून 2026 के बीच करीब 30 से 40 ट्रिप में ट्रकों के जरिए BSP प्लांट से लोहा स्क्रैप निकालकर अकलोरडीह, हथखोज के पास जमा करने और बाद में बेचने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस दावे को CDR, टावर लोकेशन और घटनास्थल के साक्ष्यों से मिलाकर जांच रही है।
दिन में प्लांट, शाम-रात में डिलीवरी का पैटर्न?
जांच में कॉल के समय को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार सुबह से दोपहर के बीच आरोपियों के बीच संपर्क ज्यादा रहा। इसे प्लांट के अंदर ट्रक की एंट्री, वजन और लोडिंग जैसी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं शाम और रात के समय कॉल बढ़ने के पैटर्न की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इन कॉल्स का संबंध प्लांट से बाहर निकले स्क्रैप की आवाजाही, ट्रक की लोकेशन और डिलीवरी से था।
किसकी क्या भूमिका? पुलिस खंगाल रही हर कड़ी
मुख्य कड़ी: संजय सिंह और अमित शर्मा
पुलिस जांच में दोनों के बीच 840 कॉल सामने आई हैं। दोनों की भूमिका ट्रकों की आवाजाही और कथित नेटवर्क के समन्वय से जुड़ी थी या नहीं, इसकी पड़ताल जारी है।
ऑपरेशन कड़ी: मिथेन और घनश्याम
मिथेन और घनश्याम के संपर्क को पुलिस लोडिंग और रूट से जोड़कर देख रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ट्रक कहां पहुंचते थे, माल किस तरह लोड होता था और किस रास्ते से बाहर जाता था।
माल खपाने की कड़ी
मुदलियार, रुपेंद्र और रावेंद्र समेत कुछ नामों को पुलिस स्क्रैप की खपत और बिक्री से जोड़कर जांच रही है। प्लांट से बाहर निकलने के बाद स्क्रैप किन लोगों तक पहुंचा और भुगतान का तरीका क्या था, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
रसमड़ा फैक्टरी तक पहुंची जांच
पुलिस की जांच में स्क्रैप की खपत से जुड़े लिंक को भी खंगाला जा रहा है। इसी कड़ी में रसमड़ा की एक फैक्टरी से विनोद गर्ग समेत दो लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि BSP से बाहर निकले कथित स्क्रैप का अंतिम ठिकाना क्या था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे।
6 पॉइंट से मिलाया जा रहा CDR और टावर लोकेशन
पुलिस ने 21 जून को तहरीर और 22 जून को घटनास्थल का नजरी नक्शा तैयार किया था। इसमें रोलिंग मिल गेट, खुर्सीपार से लेकर BSP प्लांट के अंदर रेलवे ट्रैक समेत छह प्रमुख पॉइंट चिन्हित किए गए। अब इन स्थानों को आरोपियों के मोबाइल कॉल पैटर्न और टावर लोकेशन से मिलाया जा रहा है। इससे पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल करने वाले आरोपी घटना से जुड़े संभावित स्थानों के आसपास मौजूद थे या नहीं।
22 जून से पहले अचानक कम हुई कॉल
जांच में कॉल फ्रीक्वेंसी में बदलाव भी पुलिस के लिए अहम बन गया है। पुलिस के मुताबिक 22 जून को नजरी नक्शा तैयार होने से ठीक पहले आरोपियों के बीच कॉल की संख्या में कमी आई। अब यह भी जांच का विषय है कि कॉल कम होने की वजह सामान्य थी या आरोपियों को किसी संभावित पुलिस कार्रवाई की भनक लग गई थी।
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21 गिरफ्तारियों के बाद जांच और गहराई
BSP स्क्रैप चोरी मामले में पुलिस ने पूर्व भाजपा नेता, उद्योगपति, BSP कर्मचारी समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। अब CDR, टावर लोकेशन, नजरी नक्शा और आरोपियों से जुड़े अन्य साक्ष्यों को जोड़कर कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तलाशने की कोशिश की जा रही है।




















