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लंदन। ब्रिटेन ने आज शुक्रवार को रूस पर 100 नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य रूस की तेल से होने वाली आय और उसकी सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर एकजुटता दिखाने के लिए यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचीं हैं। लंदन ने कहा है कि रूस के हालिया हवाई हमलों ने न केवल कीव के मंत्रिपरिषद भवन को गंभीर हानि पहुंचायी, बल्कि पोलैंड के नाटो हवाई क्षेत्र का भी उल्लंघन किया। इन प्रतिबंधों का सबसे अहम पहलू रूस के तथाकथित शैडो बेड़े यानी उन तेल टैंकरों को निशाना बनाना है, जिनका इस्तेमाल गुप्त तरीके से रूसी कच्चा तेल दुनिया भर में भेजने में किया जाता है। ब्रिटेन ने अब 70 और जहाजों को काली सूची में डाल दिया है।
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इस तरह, अकेले ब्रिटेन ने सबसे अधिक रूसी जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस छाया बेड़े पर अंकुश लगाना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इन्हीं जहाजों के जरिए रूस को वह नकदी मिलती है, जिससे युद्ध को वित्त पोषित किया जा रहा है। इसके अलावा, 30 व्यक्तियों और कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं जिन पर रूस को जरूरीइलेक्ट्रॉनिक पुर्जे और तकनीकी सामान उपलब्ध कराने का आरोप है। इनमें चीन की शेनजेन ब्लू हैट इंटरनेशनल ट्रेड और इसके रूसी को-ओनर शामिल हैं। इसके अलावा तुर्की की मास्टल माकीना और इसके अजरबैजानी प्रमुख पर भी कार्रवाई की गई है। ब्रिटेन का कहना है कि इन कंपनियों ने वे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे दिए जिनका इस्तेमाल रूस अपने इस्कंदर और केएच-101 मिसाइलों और ड्रोन में कर रहा है।
ब्रिटिश सरकार ने इसे रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है। पिछले दो हफ्तों में रूस ने युद्ध का अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है, जिसमें एक ही रात में 800 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। जुलाई महीने में ही रूस ने 6,500 मिसाइलें और ड्रोन दागे, जो पिछले साल की तुलना में दस गुना अधिक है। हाल के हमलों में न केवल कीव के सरकारी ढांचे को नुकसान पहुंचा है बल्कि ब्रिटिश काउंसिल और यूरोपीय संघ के दूतावास की इमारतों को भी क्षति पहुंची है। विदेश मंत्री यवेट कूपर ने साफ कहा कि ब्रिटेन चुपचाप नहीं बैठ सकता, जब व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर बर्बर आक्रमण जारी रखे हुए हैं।
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उन्होंने रूस पर नाटो हवाई क्षेत्र में ड्रोन भेजने का भी आरोप लगाया और कहा कि यह उसकी संप्रभुता की खुली अवहेलना है। कूपर ने यह भी जोर दिया कि रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उसकी नकदी प्रवाह को रोकना बेहद आवश्यक है ताकि वह इस गैरकानूनी युद्ध को जारी न रख सके। इन नए प्रतिबंधों को ब्रिटेन ने युद्ध के इस चरण में अपनी अगली रणनीतिक पहल बताया है। इसके साथ ही सुरक्षा सहायता, सहयोग और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ मिलकर ब्रिटेन का लक्ष्य यूक्रेन में एक “न्यायपूर्ण और स्थायी शांति” स्थापित करना है। कुल मिलाकर, ब्रिटेन का यह कदम रूस की आर्थिक और सैन्य क्षमता को कमजोर करने और यूक्रेन की रक्षा को और मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ा संदेश है।