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मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को उच्च स्तर पर मुनाफावसूली देखने को मिली। इस वजह से बीएसई के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स पूर्वाह्न 11.48 बजे तक 380.50 अंकों की गिरावट के साथ 84,398.34 के स्तर पर आ गया। जबकि, एनएसई का निफ्टी 82.15 अंकों की गिरावट के साथ 25,883.99 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट लगभग 0.44% की रही। शुरुआती कारोबार में बाजार स्थिर दिखाई दिया, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ता गया, जिससे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिली। हालांकि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव में नरमी और घरेलू कंपनियों के मजबूत नतीजों से शुरुआती रुख सकारात्मक रहा, परंतु निवेशकों ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों के करीब आते ही मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। सितंबर 2024 के सर्वकालिक उच्च स्तर से सूचकांक करीब 1% नीचे रहे। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में 6% की बढ़ोतरी देखने को मिली, जो निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता को दिखाता है।
सेंसेक्स और निफ्टी के साथ-साथ बीएसई के सेक्टोरल इंडेक्सों में भी गिरावट देखने को मिली। रियल्टी, वित्तीय सेवा, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। रियल्टी शेयरों में गिरावट का कारण उच्च मूल्यांकन और ब्याज दरों को लेकर चिंता रही। वहीं, फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों में बिकवाली इस बात का संकेत है कि निवेशक सावधानी बरत रहे हैं, खासकर वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के कारण। फिर भी, कुछ सेक्टरों ने बाजार को गिरावट से बचाने में मदद की। मेटल, ऑटो, पीएसयू बैंक और मिडकैप शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, जिससे गिरावट थोड़ी सीमित रही। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सों में तुलनात्मक रूप से कम कमजोरी देखने को मिली, जो बताता है कि कुछ निवेशक अभी भी चयनित स्टॉक्स में अवसर तलाश रहे हैं।
बीएसई पर 4,068 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें 1,891 में बढ़त और 1,948 में गिरावट रही, जबकि 229 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। 128 कंपनियों ने 52 हफ्ते का नया उच्च स्तर छू लिया, जबकि 48 अपने निचले स्तर पर पहुंचीं। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। टॉप गेनर्स में कारट्रेड टेक 9.45% की तेजी के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि किर्लोस्कर इंजिन्स और स्पार्क ने 7% से अधिक की बढ़त दर्ज की। दूसरी ओर, सुप्रीम इंडस्ट्रीज 4% टूट गया और बाटा इंडिया, आईआईएफएल कैपिटल्स और वारी एनर्जी जैसी कंपनियों में भी 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
कैनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट कंपनी के शेयरों में 11% की बड़ी गिरावट आई, जब कंपनी ने दूसरी तिमाही में 20% की गिरावट के साथ 49 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ घोषित किया। इस तरह, मंगलवार का सत्र निवेशकों के लिए अस्थिर और सावधानीपूर्ण रहा। बाजार अब वैश्विक संकेतों, अमेरिका-चीन वार्ता की प्रगति और घरेलू तिमाही नतीजों पर नजर रखेगा। निफ्टी के 25,800–25,950 के स्तर तकनीकी रूप से अहम सपोर्ट जोन माने जा रहे हैं। यदि विदेशी निवेशक बिकवाली जारी रखते हैं, तो बाजार में निकट भविष्य में और दबाव देखने को मिल सकता है, जबकि मजबूत कॉर्पोरेट आय और घरेलू निवेशक समर्थन से गिरावट सीमित रह सकती है। अमेरिकी फेड अगर व्याज दर में कटौती करता है तो विदेश निवेश का प्रवाह एक बार फिर भारतीय बाजार की ओर मुड़ सकता है, जिससे बाजार एक बार फिर बाउन्स बैक कर सकता है।