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छत्तीसगढ़ में ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई, DMF घोटाले से जुड़ी कई जगहों पर छापेमारी

छत्तीसगढ़ में ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई, DMF घोटाले से जुड़ी कई जगहों पर छापेमारी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    छत्तीसगढ़ में बुधवार सुबह एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की संयुक्त टीमों ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की। यह छापेमारी कथित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है।

    सुबह-सुबह कई जिलों में छापेमारी

    बुधवार को रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और धमतरी जिलों में एक साथ रेड की गई। रायपुर में पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इन्क्लेव में टीम ने छापा मारा। राजनांदगांव में तीन स्थानों पर एक साथ कार्रवाई हुई। दुर्ग के महावीर नगर में कारोबारी नीलेश पारख के घर जांच जारी है। धमतरी में भी टीमों ने कई ठिकानों पर तलाशी ली। फिलहाल, अधिकारी सरकारी सप्लाई और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।

    क्या है DMF घोटाला?

    डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) का मकसद खनन प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों पर खर्च करना था, लेकिन जांच में पता चला कि इस फंड से बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी हुई।

    ED और EOW की जांच रिपोर्ट के मुताबिक-

    कोरबा के DMF फंड से कई टेंडर अवैध तरीके से जारी किए गए। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। टेंडर की राशि का 40% तक कमीशन अफसरों को दिया गया। 2021-22 और 2022-23 में कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित IAS रानू साहू और अन्य अफसरों के साथ मिलकर ठेके हासिल किए। उन्होंने अपने NGO ‘उदगम सेवा समिति’ के नाम पर कई DMF प्रोजेक्ट लिए और अफसरों को 42% तक कमीशन दिया।

    कमीशन की फिक्स रेट – कलेक्टर से लेकर इंजीनियर तक

    EOW की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कमीशन का बंटवारा तय था-

    • कलेक्टर को 40%
    • CEO को 5%
    • SDO को 3%

    सब इंजीनियर को 2%

    DMF फंड के खर्च नियमों में बदलाव कर मटेरियल सप्लाई, खेल सामग्री, कृषि उपकरण और मेडिकल उपकरण जैसे प्रोजेक्ट जोड़े गए ताकि कमीशन वाले ठेके आसानी से पास हो सकें।

    575 करोड़ से ज्यादा का घोटाला

    जांच में पता चला है कि कोरबा जिले में 575 करोड़ रुपये से अधिक का DMF घोटाला हुआ। ACB की जांच रिपोर्ट और रायपुर कोर्ट में पेश किए गए 6 हजार पन्नों के चालान में इसकी पुष्टि हुई है।

    ED की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

    ठेकेदारों ने अफसरों और नेताओं को 25% से 40% तक कमीशन दिया। रिश्वत की रकम को फर्जी बिलों और नकली कंपनियों के जरिए छिपाया गया। जांच के दौरान 76.50 लाख रुपये कैश बरामद हुए। 8 बैंक खाते सीज किए गए जिनमें करीब 35 लाख रुपये मिले। कई फर्जी दस्तावेज, स्टांप पेपर और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं।

    आधिकारिक बयान का इंतजार

    अब तक किसी भी सरकारी विभाग या अधिकारी की ओर से इस छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और नाम उजागर हो सकते हैं और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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