कर्ज में डूबा क्लर्क बना फर्जी गैंगस्टर:लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर मांगने लगा फिरौती, हैरान कर देगी इस शातिर अपराधी की कहानी

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ऑनलाइन ट्रेडिंग में करीब 80 लाख रुपये गंवा चुका था। नुकसान की भरपाई करने के लिए उसने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम का सहारा लेकर लोगों को धमकी भरे पत्र भेजे। तकनीकी साक्ष्यों और लगातार जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
एएमयू कर्मचारी निकला रंगदारी मांगने वाला आरोपी
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान इशरत हुसैन के रूप में हुई है, जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लोअर डिवीजन क्लर्क के पद पर कार्यरत है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। इसी दबाव में उसने अपराध का रास्ता चुना। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
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ट्रेडिंग में 80 लाख गंवाने के बाद रची साजिश
जांच में यह सामने आया कि इशरत हुसैन ऑनलाइन ट्रेडिंग में लगभग 80 लाख रुपये गंवा चुका था। भारी नुकसान और कर्ज के बोझ के कारण वह मानसिक तनाव में था। इसी नुकसान की भरपाई करने के लिए उसने चर्चित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम इस्तेमाल करने की योजना बनाई। इसके बाद उसने लोगों को डराकर पैसे वसूलने की कोशिश शुरू कर दी।
प्रोफेसरों, डॉक्टरों और ज्वेलर्स को बनाया निशाना
एसएसपी नीरज जादौन के अनुसार आरोपी ने एएमयू के प्रोफेसरों, डॉक्टरों, ज्वेलर्स सहित कुल आठ लोगों को निशाना बनाया। वह स्पीड पोस्ट के माध्यम से धमकी भरे पत्र भेजता था। पत्रों में खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताते हुए लाखों रुपये की रंगदारी मांगी जाती थी। साथ ही रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी जाती थी।
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पहचान छिपाने के लिए अपनाए कई तरीके
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए दिल्ली के अलग-अलग होटलों में ठहरता था। होटल में रुकने के लिए वह फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करता था। इसके अलावा रंगदारी मांगने और पत्र भेजने की गतिविधियों के दौरान भी वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। इससे पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की जा रही थी।
48 घंटे के ऑपरेशन के बाद गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सिविल लाइन पुलिस और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया गया। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और डाक विभाग से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। लगातार 48 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से फर्जी आधार कार्ड और बैंक से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और पुलिस अब उसके संभावित नेटवर्क और अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।












