सीढ़ियां चढ़ते ही फूलने लगती है सांस? दिल की बीमारी का भी हो सकता है संकेत, जानें कब रहें अलर्ट

क्या आपको सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने लगती है या थोड़ी दूर चलते ही हांफने लगते हैं? अगर आप इसे सिर्फ बढ़ती उम्र या कमजोरी का असर मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। लगातार या बिना किसी स्पष्ट वजह के सांस फूलना कई बार किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। यह समस्या सिर्फ फेफड़ों से ही नहीं, बल्कि दिल की बीमारी, एनीमिया या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है।
सांस फूलना क्या होता है?
मेडिकल भाषा में सांस फूलने को डिस्प्निया (Dyspnea) कहा जाता है। जब शरीर को जरूरत के मुताबिक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती या सांस लेने की प्रक्रिया में परेशानी होती है, तो सांस फूलने की समस्या महसूस हो सकती है। तेज दौड़ने, व्यायाम करने या भारी काम करने के बाद कुछ समय के लिए सांस फूलना सामान्य है। लेकिन अगर थोड़ी दूरी चलने, आराम करने या रात में अचानक सांस फूलने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सांस लेने में दिल और फेफड़ों की अहम भूमिका
शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए फेफड़े, दिल, खून और मांसपेशियां मिलकर काम करते हैं। फेफड़े ऑक्सीजन को खून तक पहुंचाते हैं। लाल रक्त कोशिकाएं इस ऑक्सीजन को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाती हैं और दिल ऑक्सीजन वाले खून को पूरे शरीर में पंप करता है। इनमें से किसी भी हिस्से में परेशानी होने पर सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
दिल की बीमारी में भी फूल सकती है सांस
हर बार सांस फूलने की वजह फेफड़ों की समस्या नहीं होती। दिल की पंपिंग क्षमता कम होने या दिल तक पर्याप्त खून न पहुंचने पर भी शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में सांस फूलने लग सकती है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज में दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में वसा और कोलेस्ट्रॉल जमा होने से वे संकरी हो सकती हैं। इससे दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है। इसी तरह हार्ट वाल्व की बीमारी में भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। दिल के वाल्व रक्त को सही दिशा में बहने में मदद करते हैं। वाल्व के संकरा होने या ठीक से बंद न होने पर दिल को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
अस्थमा और COPD भी हो सकते हैं कारण
अस्थमा में फेफड़ों की वायुनलिकाओं में सूजन आ जाती है और वे संकरी हो सकती हैं। इससे सांस लेने में परेशानी होती है। इसके साथ घरघराहट, लगातार खांसी और सीने में जकड़न भी हो सकती है। धूल, धुआं, परागकण, ठंडी हवा, वायरल संक्रमण और एलर्जी के कारण अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं। वहीं COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) में वायुमार्ग संकरे होने लगते हैं और समय के साथ फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है। इसमें लगातार सांस फूलना, लंबे समय तक खांसी, बलगम और हल्की गतिविधि में भी थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
एनीमिया में भी जल्दी फूल सकती है सांस
एनीमिया में शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाता है। हीमोग्लोबिन कम होने पर शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऐसे में थोड़ा चलने, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य काम करने पर भी सांस फूल सकती है।
खून का थक्का भी हो सकता है वजह
पल्मोनरी एम्बोलिज्म एक गंभीर स्थिति है। इसमें शरीर की किसी नस में बना खून का थक्का टूटकर फेफड़ों की रक्त वाहिका तक पहुंच सकता है और रक्त प्रवाह को रोक सकता है। इस स्थिति में अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही है, धीरे-धीरे बढ़ रही है या पहले की तुलना में कम मेहनत करने पर ही हांफने लगते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। अचानक तेज सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर या बेहोशी, होंठ नीले पड़ना या सांस लेने में गंभीर परेशानी जैसे लक्षण हों तो इसे आपात स्थिति मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
नोट: सांस फूलने के कई कारण हो सकते हैं। ऊपर दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह और उचित जांच जरूरी है।




















