सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद पर सुनवाई: प्रतिमा देवी की आपत्ति पर टली बहस, बराबर हिस्से की मांग रखी

ग्वालियर। प्रतिमा देवी ने कहा कि राजमाता विजयराजे सिंधिया की वसीयत की मूल प्रति उनके पास नहीं है, लेकिन मुंबई की अदालत में मौजूद वसीयत की कॉपी के आधार पर उन्होंने बराबर हिस्से की मांग रखी। उन्होंने कहा कि नोटिस नेपाल के नेपागंज पते पर भेजे गए, जबकि उनका वास्तविक निवास काठमांडू में है, इसलिए उन्हें उचित अवसर नहीं मिला। वहीं, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से अधिवक्ताओं ने कहा कि बंटवारे की प्रक्रिया में प्रतिमा देवी की उपस्थिति और लिखित सहमति रिकॉर्ड पर मौजूद है।
प्रतिमा देवी ने संपत्ति में बराबर हिस्से की मांग रखी
प्रतिमा देवी ने कहा कि राजमाता विजयराजे सिंधिया की वसीयत की मूल प्रति उनके पास नहीं है। हालांकि, मुंबई की अदालत में मौजूद वसीयत की कॉपी का जिक्र करते हुए उन्होंने संपत्ति में बराबर हिस्से की मांग रखी। उन्होंने नोटिस की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं मिला।
नेपाल के पते पर नोटिस भेजने की कही बात
प्रतिमा देवी का कहना था कि नोटिस नेपाल के नेपागंज पते पर भेजे गए, जबकि उनका वास्तविक निवास काठमांडू में है। इस कारण उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं मिला और उन्हें एकतरफा घोषित कर दिया गया। उन्होंने अपनी छोटी बहनों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे भी संपत्ति में हिस्सा चाहती हैं और अपनी मां के हिस्से पर दावा कर रही हैं। पदमावती जीवाजी राव सिंधिया की बेटी थीं। प्रतिमा देवी की ओर से संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया और नोटिस से जुड़े मुद्दों को न्यायालय के सामने रखा गया।
बंटवारे को लेकर पहले हो चुका है आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट
दरअसल, सिंधिया परिवार की संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच लंबे समय से मामला चल रहा है। परिवार के सदस्यों के बीच बंटवारे को लेकर आपसी सहमति बनने के बाद आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट भी हुआ था। इसी समझौते में प्रतिमा देवी को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने कोर्ट में कहा कि बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी की उपस्थिति और उनकी लिखित सहमति रिकॉर्ड पर मौजूद है। दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी हैं।
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'बंटवारे की प्रक्रिया में प्रतिमा देवी की सहमति थी'
प्रतिमा देवी के इस दावे पर कि उन्हें बंटवारे की प्रक्रिया से अलग रखा गया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा कि यह कहना सही नहीं है। अधिवक्ताओं के मुताबिक, बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी की उपस्थिति और उनकी लिखित सहमति रिकॉर्ड पर मौजूद है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से पिछली सुनवाई में जवाब पेश किया जा चुका है। इसमें कहा गया है कि संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार किया गया है। मामले में अब अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।





















