कांवड़ यात्रा: शिवभक्ति के सैलाब में डूबा सीहोर, पंडित प्रदीप मिश्रा संग चले लाखों भक्त; आस्था के बीच जाम से परेशानी

सीहोर। सावन और प्रदोष के पावन संयोग पर मंगलवार को सीहोर ने शिवभक्ति का ऐसा विराट दृश्य देखा, जिसने पूरे शहर को धार्मिक आस्था के महासागर में बदल दिया। सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वर धाम तक निकली करीब 11 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। धाम के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित के अनुसार सुबह से रात तक करीब 6 लाख श्रद्धालुओं ने सीवन नदी से जल भरकर भगवान कुबेरेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया। भगवा ध्वजों, कांवड़ों और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा सीहोर गूंजता रहा। हालांकि श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ ने यातायात व्यवस्था की भी कड़ी परीक्षा ली और कई मार्गों पर वाहन घंटों जाम में फंसे रहे।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने उठाई कांवड़, भक्तों का बढ़ा उत्साह
कांवड़ यात्रा का सबसे भावुक और आकर्षक क्षण उस समय आया, जब अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा स्वयं सीवन नदी तट पहुंचे। सुबह करीब सवा नौ बजे उन्होंने विधि-विधान से पूजन किया और कांवड़ में सीवन नदी का जल भरा। इसके बाद वे श्रद्धालुओं के साथ पैदल कुबेरेश्वरधाम की ओर रवाना हुए। पंडित मिश्रा को कांवड़ लेकर अपने बीच चलता देख श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव, बम-बम भोले और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष सुनाई देते रहे।
बारिश में भी नहीं थमे शिवभक्तों के कदम
यात्रा के दौरान मौसम ने भी श्रद्धालुओं की परीक्षा ली। यात्रा शुरू होते ही रिमझिम बारिश होने लगी, लेकिन बारिश भी भक्तों की आस्था को डिगा नहीं सकी। भगवा वस्त्र पहने कांवड़िए भजन गाते और शिव नाम का जाप करते हुए लगातार आगे बढ़ते रहे। किसी के कंधे पर सजी कांवड़ थी तो किसी के हाथ में भगवा ध्वज। बारिश और भक्ति के इस संगम ने पूरे मार्ग को अद्भुत धार्मिक वातावरण में बदल दिया।

अलग-अलग राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु, सीहोर बना मिनी इंडिया
कांवड़ यात्रा में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तरप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अलग-अलग राज्यों की भाषा, वेशभूषा और संस्कृति के लोग एक ही रंग में रंगे नजर आए। सीवन नदी से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक सड़कें भगवा ध्वजों और कांवड़ियों से पट गईं। यही वजह रही कि श्रद्धालुओं की विविधता के बीच पूरा सीहोर मिनी इंडिया जैसा दिखाई दिया।
100 से अधिक सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं की सेवा
लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सीवन नदी से कुबेरेश्वर धाम तक 100 से अधिक सेवा शिविर लगाए गए। कहीं भोजन-प्रसादी बांटी गई तो कहीं फलहारी खिचड़ी, नाश्ता, केले, फल, बिस्किट और पेयजल की व्यवस्था रही। सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों और विठलेश सेवा समिति के सेवादारों ने श्रद्धालुओं की सेवा की। पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अनेक सेवादार व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
450 किलोमीटर पैदल चलकर जलगांव से पहुंचा श्रद्धालुओं का दल
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं की भक्ति के कई अनूठे दृश्य भी सामने आए। महाराष्ट्र के जलगांव से श्रद्धालुओं का एक दल भगवान भोलेनाथ की झांकी लेकर करीब 450 किलोमीटर पैदल यात्रा कर कुबेरेश्वरधाम पहुंचा। यात्रा में आधा दर्जन से अधिक आकर्षक झांकियां, बैंड-बाजे, भजन मंडलियां और प्रसिद्ध भजन गायकों की प्रस्तुतियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं।
हार्ट अटैक के बाद डॉक्टर ने कंधे पर बैठाकर पहुंचाया श्रद्धालु
इतनी विशाल भीड़ के बीच महाराष्ट्र के जलगांव से आए एक श्रद्धालु को मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर अचानक हार्ट अटैक आने की घटना भी सामने आई। लोगों ने एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन भारी भीड़ के कारण हाईवे पर करीब 100 मीटर दूर खड़ी एंबुलेंस मौके तक नहीं पहुंच सकी। करीब आधे घंटे तक रास्ता नहीं मिलने पर मौके पर मौजूद डॉक्टर ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए श्रद्धालु को अपने कंधे पर बैठाया और पैदल हाईवे तक पहुंचाया। इसके बाद उसे एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
तीन साथी लापता, भीड़ में अपनों की तलाश करते रहे श्रद्धालु
पुणे से आए दिलीप माने ने बताया कि उनकी पत्नी वंदना माने समेत तीन साथी करीब तीन घंटे से नहीं मिल रहे हैं। वे पांच लोगों के साथ कांवड़ यात्रा में शामिल हुए थे। जल भरने के दौरान वह और एक साथी आगे आ गए, जबकि दो महिलाएं और एक लड़का पीछे रह गए। सभी ने एक स्थान पर मिलने की बात तय की थी, लेकिन बाद में तीनों का पता नहीं चल सका। विशाल भीड़ के बीच परिजन लगातार अपनों की तलाश करते रहे।
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आस्था के सैलाब के बीच सड़कों पर रेंगते रहे वाहन
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का सीधा असर यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। शहर के अंदरूनी मार्गों के साथ हाईवे और कुबेरेश्वरधाम की ओर जाने वाले रास्तों पर कई जगह वाहन रेंगते नजर आए। प्रशासन ने पहले से डायवर्सन प्लान लागू किया था, लेकिन वाहनों की संख्या अचानक बढ़ने से कई वैकल्पिक मार्गों पर भी दबाव बढ़ गया।
दो घंटे से ज्यादा जाम में फंसे यात्री
भाऊखेड़ी जोड़ से इछावर क्रिसेंट मार्ग और वहां से बिलकिसगंज की ओर जाने वाले रास्ते पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कई वाहन चालक और यात्री दो घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसे रहे। भारी भीड़ के बीच वाहनों को निकालना मुश्किल हो गया। आष्टा क्षेत्र में भी 3 से 4 घंटे तक लोगों के जाम में फंसे रहने के समाचार सामने आए।

डायवर्सन से वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ा वाहनों का दबाव
कांवड़ यात्रा के चलते भोपाल से आष्टा, देवास, उज्जैन और इंदौर जाने वाले छोटे एवं सवारी वाहनों को सीहोर न्यू क्रिसेंट चौराहा से भाऊखेड़ी जोड़ और अमलाहा होते हुए आष्टा की ओर भेजा गया। वहीं इंदौर, उज्जैन और देवास से भोपाल जाने वाले वाहनों को आष्टा-अमलाहा-भाऊखेड़ी जोड़-न्यू क्रिसेंट चौराहा मार्ग से निकाला गया। वाहनों का दबाव बढ़ने से इन रास्तों पर भी जाम की स्थिति बनी।
भारी वाहनों के रूट में भी किया गया बदलाव
कन्नौद-खातेगांव की ओर से आने वाले भारी वाहनों को आष्टा, शुजालपुर और पचोर होते हुए ब्यावरा की ओर भेजा गया। वहीं होशंगाबाद, रेहटी और भैरूंदा से इंदौर जाने वाले भारी वाहनों को गोपालपुर, कन्नौद और आष्टा के रास्ते निकाला गया। प्रशासन का डायवर्सन प्लान 23 अगस्त सुबह 6 बजे से 25 अगस्त रात 12 बजे तक लागू रखा गया।
आस्था ने बनाया इतिहास, लेकिन यातायात ने भी दिखाई चुनौती
सीहोर में मंगलवार को निकली कांवड़ यात्रा ने धार्मिक आस्था, सेवा और सामाजिक सहभागिता का विराट उदाहरण पेश किया। करीब 6 लाख श्रद्धालुओं का जलाभिषेक और 11 किलोमीटर लंबे मार्ग पर उमड़ा जनसैलाब इस आयोजन की विशालता बताता है। पंडित प्रदीप मिश्रा की मौजूदगी ने यात्रा को और विशेष बना दिया। वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और वाहनों की मौजूदगी ने यातायात प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती भी खड़ी की।
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