ट्रेन में मरे चूहों की दुर्गंध की शिकायत की तो कोच में छिडक दिया कीटनाशक स्प्रे, तीन साल की बच्ची समेत यात्रियों का घुटने लगा दम

इंदौर। रेल के एसी कोच में चूहों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। ऊना इंदौर एक्सप्रेस में वृद्ध को चूहों के काटने के बाद अब नया मामला दौंड-इंदौर एक्सप्रेस में सामने आया है। इसके एसी कोच में चूहों और कॉकरोचों से परेशान यात्रियों ने जब राहत की उम्मीद में शिकायत की तो कार्रवाई ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी। दरसल पुणे से इंदौर आ रही दौंड-इंदौर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22943) के एसी कोच में चूहे बर्थ तक दौड़ रहे थे, कॉकरोच सीटों पर घूम रहे थे और एसी डेक पर एक मरा हुआ चूहा सड़ रहा था। यात्रियों ने इसकी शिकायत की तो उन्हें कोच से बाहर निकालने के बजाय बंद एसी कोच में ही कीटनाशक का स्प्रे कर दिया गया। तेज गंध और धुएं से यात्रियों का दम घुटने लगा।
यात्री ने रेल मंत्री तक की शिकायत
परिवार और तीन साल की बच्ची के साथ यात्रा कर रहे यात्री मयंक शुक्ला ने रेलवे सेवा और रेल मंत्री से शिकायत करते हुए बताया कि रातभर चूहों और कॉकरोचों ने यात्रियों को परेशान किया। चूहे बर्थ तक पहुंच रहे थे, जिससे यात्री सो भी नहीं सके। पूरी रात जागकर गुजारने के बाद जब उन्होंने शिकायत की तो समस्या का समाधान करने पहुंचे कर्मचारियों ने कोच में स्प्रे कर दिया। यात्री के मुताबिक स्प्रे के बाद कोच में इतनी तेज गंध और धुआं फैल गया कि सांस लेना मुश्किल हो गया। तीन साल की बच्ची के साथ यात्रा कर रहे परिवार ने ताजी हवा की जरूरत बताई। ऐसे में जिस कार्रवाई का उद्देश्य यात्रियों को चूहों और कॉकरोचों से राहत देना था, वही उनके लिए सांस लेने की परेशानी का कारण बन गई।
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मरा चूहा सड़ता रहा, कहां थे जिम्मेदार
कोच की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसी डेक पर पड़ा मरा हुआ चूहा भी समय पर नहीं हटाया गया। उससे बदबू फैलती रही। दूसरी ओर जिंदा चूहे बर्थ तक पहुंच रहे थे और कॉकरोच सीटों पर घूम रहे थे। इससे ट्रेन रवाना होने से पहले होने वाली सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्री ने रेलवे सेवा में शिकायत दर्ज कराई। मामला रतलाम मंडल के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की जानकारी दी गई और डीआरएम कार्यालय की ओर से भी संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए अवगत कराने का जवाब मिला। लेकिन यात्री की अगली शिकायत के मुताबिक चूहे और कॉकरोच की समस्या इसके बाद भी बनी रही।
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