Ayodhya Ram Mandir:जून भर सुर्खियों में रहा राम मंदिर चढ़ावा विवाद, आखिर क्या-क्या हुआ?

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। एसआईटी जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे और विपक्ष की मांगों ने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। अदालत ने आठों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। वहीं कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच, ट्रस्ट पर कार्रवाई और एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं।
आठों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ी
राम मंदिर चढ़ावा मामले में गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों की तीन दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इससे पहले विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब जांच एजेंसियां न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ मामले से जुड़े सभी तथ्यों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
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दानपात्र से जुड़े कर्मचारियों पर दर्ज हुई एफआईआर
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर 25 जून को आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। ये सभी उस टीम का हिस्सा बताए गए हैं, जो राम मंदिर परिसर में स्थापित 40 दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र तक पहुंचाने और उसकी गणना करने का कार्य करती थी। यह मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में दर्ज किया गया।
23 जून को एसआईटी ने सरकार को सौंपी थी रिपोर्ट
चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की खबरें सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। इस टीम में आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया। 15 जून से एसआईटी ने जांच और पूछताछ शुरू की और गठन के दस दिनों के भीतर 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले पर कहा था कि जांच के जरिए 'दूध का दूध और पानी का पानी' सामने आएगा।
फैजाबाद बार एसोसिएशन ने पैरवी से किया इनकार
मामले के बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आम सभा में निर्णय लिया कि उसके सदस्य इस प्रकरण के आरोपियों की ओर से पैरवी नहीं करेंगे। साथ ही यह भी तय किया गया कि अगर कोई सदस्य आरोपियों का पक्ष रखता है तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की जानकारी भी सामने आई।
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कांग्रेस ने उठाए छह बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने सरकार से एसआईटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। पार्टी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने, चंपत राय और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने, मंदिर में शुरू से प्राप्त सभी चढ़ावों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच कराने की मांग रखी।
धार्मिक आस्था और राजनीतिक बहस के केंद्र में मामला
बता दें कि राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।












