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ईरान से तेल खरीदना भारत को पड़ा भारी : पहले 25% टैरिफ… अब अमेरिका ने 6 भारतीय कंपनियों पर लगाया बैन; आखिर चाहते क्‍या हैं ट्रंप?

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ईरान से तेल खरीदना भारत को पड़ा भारी : पहले 25% टैरिफ… अब अमेरिका ने 6 भारतीय कंपनियों पर लगाया बैन; आखिर चाहते क्‍या हैं ट्रंप?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच चले आ रहे तनाव का असर अब भारत की कंपनियों पर भी दिखाई देने लगा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का व्यापार करने वाली 6 भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इस कार्रवाई की घोषणा की और इन कंपनियों पर ईरानी उत्पादों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया।

    अमेरिका का आरोप: प्रतिबंधों का उल्लंघन

    अमेरिका ने कहा है कि इन कंपनियों ने ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद-बिक्री में "महत्वपूर्ण लेनदेन" किए हैं, जो कि कार्यकारी आदेश (Executive Order) 13846 का सीधा उल्लंघन है। अमेरिका का यह आदेश उन सभी संस्थाओं को प्रतिबंधित करता है जो ईरानी ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े व्यापार में संलिप्त हैं।

    किन भारतीय कंपनियों पर लगा प्रतिबंध?

    अलकेमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड

    इस कंपनी पर जनवरी से दिसंबर 2024 के बीच ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों का 84 मिलियन डॉलर (लगभग ₹714 करोड़) का आयात करने का आरोप है।

    ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड

    कंपनी ने जुलाई 2024 से जनवरी 2025 के बीच 51 मिलियन डॉलर (करीब ₹433 करोड़) के मेथनॉल और अन्य ईरानी उत्पाद खरीदे।

    जुपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड

    इस कंपनी पर 49 मिलियन डॉलर (लगभग ₹416 करोड़) मूल्य के टोल्यूनि सहित ईरानी उत्पादों का आयात करने का आरोप है।

    रमणिकलाल एस गोसालिया एंड कंपनी

    इस भारतीय कंपनी ने 22 मिलियन डॉलर (करीब ₹187 करोड़) मूल्य के मेथनॉल और टोल्यूनि जैसे उत्पाद ईरान से मंगवाए।

    पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड

    इस कंपनी ने अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच 14 मिलियन डॉलर (करीब ₹119 करोड़) मूल्य के ईरानी पेट्रोकेमिकल्स का व्यापार किया।

    कंचन पॉलिमर्स

    कंपनी पर 1.3 मिलियन डॉलर (करीब ₹11 करोड़) से अधिक के ईरानी पॉलीएथिलीन उत्पादों का आयात करने का आरोप है।

    क्या होगा इन कंपनियों पर असर?

    अमेरिकी संपत्तियां जब्त: इन कंपनियों की अमेरिका में मौजूद या अमेरिकी नियंत्रण में आने वाली संपत्तियां फ्रीज़ कर दी गई हैं।

    व्यापारिक संबंध खत्म: अमेरिकी नागरिक और कंपनियां अब इन भारतीय कंपनियों से कोई लेनदेन नहीं कर पाएंगी।

    50% से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली कंपनियां भी बैन के दायरे में आएंगी।

    ग्लोबल सप्लाई चेन में झटका: ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा रही हैं, ऐसे में उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होंगे। 

    भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर संभव

    भारत ने पारंपरिक रूप से ईरान के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाए रखे हैं। हालांकि, 2019 के बाद से अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में आकर भारत ने ईरानी तेल का आयात घटा दिया था। फिर भी कुछ कंपनियां अब तक व्यापार कर रही थीं, जो अब ट्रंप प्रशासन की नजर में आ गई हैं।

    इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है। भारत को अब ईरान और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब वह ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पहले से ही दबाव में है।

    तुर्की, यूएई और चीन की कंपनियां भी निशाने पर

    अमेरिका की इस कार्रवाई की जद में सिर्फ भारत की कंपनियां नहीं आईं, बल्कि तुर्की, यूएई, चीन और इंडोनेशिया की कई कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये कंपनियां ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल्स की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हैं और इससे मिलने वाला राजस्व ईरान आतंकवाद फैलाने वाली गतिविधियों में लगाता है।

    ये भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाया 25% टैरिफ, साथ में जुर्माना भी वसूलेगा अमेरिका, रूस से संबंधों पर नाराजगी, 1 अगस्त से लागू होगा शुल्क

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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