वॉशिंगटन। अमेरिका में मौसमी क्लॉक एडजस्टमेंट खत्म करने और पूरे साल डेलाइट सेविंग टाइम लागू करने के लिए दोबारा शुरू हुए राजनीतिक अभियान का कैपिटल हिल और मेडिकल कम्युनिटी दोनों तरफ से विरोध हो रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मनोरंजन और बिजनेस के लिए शाम में अतिरिक्त धूप उपलब्ध कराने के मकसद से सांसदों पर इस बिल को पास करने के लिए भारी दबाव बनाया है। वहीं वैज्ञानिक सबूतों का बढ़ता दायरा चेतावनी दे रहा है कि यह पॉलिसी लॉन्ग-टर्म पब्लिक हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती है। अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्य 1942 में वॉरटाइम मेजर के तौर पर पहली बार अपनाए जाने के बाद से ही डेलाइट सेविंग टाइम के संभावित फायदों और नुकसानों में इंटरेस्ट रखते रहे हैं। सीनेट ने 2022 में डेलाइट सेविंग टाइम को परमानेंट बनाने के लिए एक बिल पास किया था, लेकिन यह हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अटक गया।
जाने क्यों बदलते हैं घड़ियों का टाइम
सीजनल क्लॉक एडजस्टमेंट (Seasonal clock adjustments): अमेरिका और यूरोप जैसे कई देशों में साल में दो बार घड़ी का समय बदला जाता है। गर्मियों में सूरज की रोशनी का ज्यादा फायदा उठाने के लिए घड़ी को 1 घंटा आगे बढ़ा दिया जाता है। इसे जिसे Daylight Saving Time कहते हैं और सर्दियों में इसे फिर से 1 घंटा पीछे कर दिया जाता है। वहीं, लॉकिंग इन ईयर-राउंड (Locking in year-round) का मतलब है कि अब साल में दो बार घड़ी बदलने का झंझट खत्म कर दिया जाए। गर्मियों वाले समय (DST) को ही हमेशा के लिए (स्थायी रूप से) लागू रख दिया जाए, चाहे सर्दी हो या गर्मी। इस बारे में बता दें कि डेलाइट सेविंग टाइम वसंत और पतझड़ के बीच की वह अवधि है जब अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में घड़ियों को स्टैंडर्ड टाइम से एक घंटा आगे कर दिया जाता है।
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कनाडा टाइम बदलने को खत्म कर सकता है
इस संबंध में कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में एक रिसर्च रिव्यू के पब्लिश होने के साथ इस हफ्ते यह बहस फिर से तेज हो गई है। कई कैनेडियन क्षेत्र अपने खुद के क्लॉक चेंज को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। रिसर्चर्स ने परमानेंट स्टैंडर्ड टाइम की तुलना में परमानेंट डेलाइट सेविंग टाइम के फिजियोलॉजिकल इफेक्ट्स का अध्ययन किया है। उनके निष्कर्ष परमानेंट स्टैंडर्ड टाइम को एक हेल्दी ऑप्शन के तौर पर सपोर्ट करते हैं। साथ ही यह चेतावनी भी देते हैं कि सर्दियों की सुबह के अंधेरे के साथ शाम को ज्यादा रोशनी मानव शरीर की बुनियादी बायोलॉजी के खिलाफ है।
शोधकर्ता घड़ी बदलने के खिलाफ क्यों हैं
रिसर्च रिपोर्ट के लेखकों के मुताबिक, इंसान की सर्कैडियन लय लगभग 24.2 घंटे के नेचुरल साइकल पर चलती है और शरीर के जरूरी फंक्शन्स को रीसेट और सिंक करने के लिए सुबह की नेचुरल धूप पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। हालांकि देर तक उजाला रहने वाले दिन शाम के ट्रैवल और आउटडोर एक्टिविटीज के लिए सुविधाजनक हो सकते हैं। लेकिन, लेट सनराइज नेचुरल तरीके से जागने की प्रक्रिया को दबा देता है। इसके उलट, शाम के वक्त देर तक रहने वाली रोशनी इंटरनल क्लॉक में देरी करती है। इससे नींद की क्वालिटी, मूड और डेली प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ता है।
जगह के हिसाब से नींद पर पड़ता है असर
कैनेडियन रिव्यू में ऐसे सबूत पेश किए गए हैं जो बताते हैं कि टाइम जोन के पश्चिमी छोर पर रहने वाले अमेरिकी- जहां सूरज देर से डूबता है, पूर्वी छोर पर रहने वालों की तुलना में हर हफ्ते लगभग एक घंटे की नींद खो देते हैं। रिसर्चर्स ने निष्कर्ष निकाला कि भले ही साल में दो बार होने वाले क्लॉक एडजस्टमेंट को खत्म करने से हर साल कुछ हफ्तों का तुरंत होने वाला डिसरप्शन खत्म हो जाता है, लेकिन परमानेंट डेलाइट सेविंग टाइम के नतीजे लॉन्ग-टर्म होंगे। उनकी सिफारिश इंटरनेशनल क्रोनोबायोलॉजी और स्लीप मेडिसिन ऑर्गेनाइजेशन्स के बीच बनी व्यापक सहमति के मुताबिक है। उसमें ब्रिटिश स्लीप एक्सपर्ट्स की तरफ से 2024 में जारी एक गाइडलाइन भी शामिल है, जिसमें ग्रीनविच मीन टाइम को परमानेंट तौर पर स्थिर रखने की वकालत की गई है।
स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम बिल की मौजूदा स्थिति
सनशाइन प्रोटेक्शन एक्ट के नाम से जाना जाने वाला यह बिल इस साल जुलाई में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हो गया था। लेकिन, सीनेट में इसे रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है, जहां कुछ रिपब्लिकन सांसद इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन समेत इस बिल के समर्थकों का तर्क है कि इस बदलाव से दिन के उस समय ज्यादा उजाला मिलेगा जब अमेरिकी सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं। वहीं, इसके विरोधियों का कहना है कि परमानेंट डेलाइट सेविंग टाइम से सर्दियों की सुबहें और ज्यादा अंधेरी और संभावित रूप से ज्यादा खतरनाक हो जाएंगी। इन चेतावनियों के बावजूद, वाशिंगटन में इसको लेकर विधायी गतिविधि विवादों में घिरी हुई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने परमानेंट डेलाइट सेविंग टाइम लागू करने वाले विधेयक को आगे बढ़ाया है, लेकिन यह सीनेट में अटका हुआ है। इस गतिरोध ने राष्ट्रपति ट्रंप को पब्लिक प्रेशर बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, यहां तक कि उन्होंने अर्कांसस के सीनेटर टॉम कॉटन का प्राइवेट मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।