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अमेरिका-भारत रिश्तों पर संकट… पूर्व अमेरिकी NSA जॉन बोल्टन बोले- ट्रंप-मोदी की दोस्ती अब बीते दौर की बात

अमेरिका-भारत रिश्तों पर संकट… पूर्व अमेरिकी NSA जॉन बोल्टन बोले- ट्रंप-मोदी की दोस्ती अब बीते दौर की बात
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कभी गहरी मानी जाने वाली दोस्ती अब खत्म हो चुकी है। बोल्टन का कहना है कि ट्रंप की निजी संबंधों पर आधारित विदेश नीति ने भारत-अमेरिका रिश्तों को दशकों पीछे धकेल दिया है और इससे भारत अब रूस और चीन के और करीब जाता दिखाई दे रहा है।

    बोल्टन का आरोप- "दोस्ती बुरे हालात से नहीं बचा सकती"

    ब्रिटिश मीडिया एलबीसी (LBC) को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने कहा कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नेताओं के साथ अपनी व्यक्तिगत नज़दीकी के आधार पर आंकते हैं।

    उन्होंने कहा- "ट्रंप और मोदी के बीच पहले बहुत अच्छे रिश्ते थे, लेकिन अब यह खत्म हो चुके हैं। यह सभी नेताओं के लिए सबक है कि ट्रंप से व्यक्तिगत रिश्ता अस्थायी लाभ दे सकता है, लेकिन यह आपको कठिन हालात से नहीं बचा पाएगा।"

    भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार क्यों आई?

    बोल्टन के मुताबिक, भारत पर अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए 50% तक के टैरिफ ने हालात और बिगाड़ दिए। उनका कहना है कि दोस्त और दुश्मन देशों पर एक जैसा शुल्क लगाना एक "भारी भूल" है, जिससे भारत का भरोसा अमेरिका पर कमजोर हुआ है।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यह नीति भारत को रूस और चीन की तरफ झुका रही है, जबकि अमेरिका वर्षों से चाहता था कि भारत चीन को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती माने।

    चीन और रूस बने विकल्प

    बोल्टन ने कहा कि चीन ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए खुद को अमेरिका और ट्रंप के विकल्प के रूप में पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा- "व्हाइट हाउस की नीतियों ने मोदी को रूस और चीन के करीब ला दिया है। यह स्थिति भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए खतरनाक है।"

    'हाउडी मोदी' से अब तक का सफर

    बोल्टन ने याद दिलाया कि ट्रंप और मोदी के बीच कभी "ब्रोमेंस" जैसी नजदीकी थी। अमेरिका में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ रैली और ट्रंप की भारत यात्रा उस दौर की गवाही देती हैं। लेकिन अब यह सब खत्म हो चुका है और दोनों देशों के रिश्ते पिछले दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

    विशेषज्ञों की चेतावनी

    विदेश नीति विशेषज्ञों का भी मानना है कि ट्रंप के टैरिफ और भारत के खिलाफ लगातार आलोचना रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पैडिला के अनुसार, "भारत इन टैरिफ को लंबे समय तक याद रखेगा और इससे अमेरिका पर उसका भरोसा कमजोर होगा।"

    ये भी पढ़ें: व्हाइट हाउस में ट्रंप का 'हाई IQ डिनर': गूगल, एपल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा समेत दिग्गज टेक लीडर्स शामिल; एलन मस्क को न्योता नहीं

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

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