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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 10 साल की सजा

बांग्लादेश की एक कोर्ट ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को सरकारी आवास परियोजना में भूमि आवंटन से जुड़ी कथित अनियमितताओं से संबंधित भ्रष्टाचार के दो अलग-अलग मामलों में सोमवार को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 10 साल की सजा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ लाते हुए ढाका की एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सरकारी हाउसिंग प्रोजेक्ट में जमीन आवंटन से जुड़े भ्रष्टाचार के दो मामलों में दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों मामलों में पांच-पांच साल की सजा सुनाते हुए कुल 10 साल की जेल की सजा तय की है। यह फैसला ढाका स्पेशल जज कोर्ट-4 के न्यायाधीश रबीउल आलम ने सुनाया। सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस के मुताबिक, ये मामले पूर्बाचोल राजुक न्यू टाउन प्रोजेक्ट से जुड़े हैं।

    परिवार के सदस्य भी दोषी, अलग-अलग सजाएं 

    अदालत ने 78 वर्षीय शेख हसीना के साथ उनके करीबी परिजनों को भी दोषी माना है। हसीना के भतीजे रादवान मुजीब सिद्दीक और भतीजी अजमीना सिद्दीक को दोनों मामलों में सात-सात साल की जेल की सजा सुनाई गई है। वहीं, ब्रिटेन की सांसद रह चुकीं ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक को प्रत्येक मामले में दो-दो साल, कुल चार साल की कैद की सजा दी गई। अदालत का मानना है कि इन सभी ने प्लॉट आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं में भूमिका निभाई।

    जुर्माना भी लगाया, नहीं देने पर बढ़ेगी सजा

    अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने वाले एकमात्र आरोपी मोहम्मद खुर्शीद आलम को दोनों मामलों में एक-एक साल की सजा दी गई, यानी कुल दो साल की जेल। इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख टका का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि अदा न करने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

    पहले भी मिल चुकी है मौत की सजा

    गौरतलब है कि यह शेख हसीना के खिलाफ आया दूसरा बड़ा न्यायिक फैसला है। इससे पहले नवंबर 2024 में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने छात्र विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में शेख हसीना और उनके करीबी सहयोगी, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से वहीं रह रही हैं। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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