Aakash Waghmare
2 Feb 2026
Manisha Dhanwani
2 Feb 2026
Aakash Waghmare
1 Feb 2026
इस्लामाबाद। भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA से पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते से पाकिस्तान की करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और उसे अरबों डॉलर के नुकसान का डर भी सताने लगा है। गुरुवार को पाकिस्तान ने स्वीकार किया कि वह इस मुद्दे पर EU अधिकारियों के संपर्क में है।
पाकिस्तान सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि भारत-EU FTA का उसके निर्यात पर कितना और किस तरह का असर पड़ेगा। खासतौर पर टेक्सटाइल, लेदर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा झटका लगने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने सोशल मीडिया पर चिंता जताई है। उन्होंने लिखा कि EU के साथ पाकिस्तान का ‘जीरो-टैरिफ हनीमून’ अब खत्म हो चुका है और करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि उद्योगों को सस्ती बिजली, कम टैक्स और आसान कर्ज मुहैया कराया जाए, ताकि वे दूसरे देशों की इंडस्ट्री से मुकाबला कर सकें।
गौरतलब है कि भारत और यूरोपियन यूनियन ने 27 जनवरी को FTA पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते से दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी, 25 प्रतिशत ग्लोबल GDP और करीब 2 अरब लोगों का साझा मार्केट तैयार हो गया है, जिससे भारत को बड़ा आर्थिक फायदा मिलने की उम्मीद है। देश में कई इंपोर्टेड प्रोडक्ट्स की प्राइस गिरेगी और कम दामों में लोग इन चीजों का उपयोग कर पाएंगे। इनमें कपड़ा सहित मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
भारत और यूरोपियन यूनियन के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई है। कारोबारी वर्ग को इस बात का डर है कि उसकी जीएसपी प्लस सुविधा 2027 में समाप्त होने वाली है। अगर यूरोपियन यूनियन ने इसे आगे नहीं बढ़ाया, तो यूरोप के साथ पाकिस्तान का व्यापार और महंगा हो जाएगा।
पाकिस्तानी उद्योग जगत का मानना है कि ऐसे हालात में भारत जैसे बड़े और विविध उत्पादन आधार वाले देश के सामने टिके रहना बेहद मुश्किल होगा। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि एक बार अगर यूरोपीय बाजार में हिस्सेदारी घट गई, तो उसे दोबारा हासिल करना बहुत कठिन हो जाता है। खासतौर पर टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट आधारित सेक्टर को सबसे बड़ा झटका लग सकता है।