पल्लवी वाघेला, भोपाल। सास द्वारा जीवन में दखलअंदाजी और घर तोड़ने की कोशिश का आरोप लेकर कई बहुएं शिकायत करने पहुंचती हैं, लेकिन जिला विधिक प्राधिकरण और महिला आयोग में पहुंचा यह मामला कुछ अलग है। यहां एक बेटी अपनी मां के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंची। बेटी ने कहा कि मां की वजह से उसकी शादी टूटने की कगार पर है। बेटी ने आवेदन में बताया कि मां, ससुराल में हस्तक्षेप करती है और अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा पति को देने को लेकर भी विवाद करती है।
जब मां की काउंसलिंग की गई तो समझ आया कि वह अपने बुरे अनुभवों के चलते चाहती है कि बेटी का पैसा अलग सेविंग में रहे। वर्तमान में मां को एक माह के लिए बेटी के जीवन से दूर रहने की समझाइश दी गई है। मां का कहना है कि ससुराल कभी अपना नहीं होता और सास कभी मां नहीं बन सकती, बेटी की सच्ची हितैषी मां ही होती है।
युवती ने कहा कि मां आए दिन उसके ससुराल पहुंच जाती हैं और यहां बहस और झगड़ा करती है। युवती ने कहा कि उसे ससुरालवालों से शिकायत नहीं है। पति भी सरकारी नौकरी में अच्छा कमाते हैं और मां को पैसा देने पर कभी मना नहीं करते। उल्टा मां ही मुझसे ब्यौरा मांगती हैं कि मेरी सैलरी कहां और कितनी खर्च हो रही है। युवती ने कहा कि बीते साल मां के कहने पर ही एक जमीन खरीदी थी इसके पेपर और शादी का गोल्ड भी मां अपने पास रखी हुई हैं। युवती ने कहा कि मैं समझ नहीं पा रही कि आखिर मां क्या चाहती हैं?
मामले में मध्यस्थता केंद्र पहुंची मां ने कहा कि वह केवल बेटी का भविष्य अच्छा चाहती है। मां ने कई एफडी भी दिखाई, जिनकी नॉमिनी बेटी है। मां ने कहा कि वह बहुत कम पैसा खर्च करती हैं और सब बेटी के लिए जोड़ती हैं। मां ने कहा कि उन्हें लगता है कि यदि बेटी के पास पैसा न हो तो ससुराल वाले उसे अच्छे से नहीं रखेंगे। इसलिए वह चाहती है थी कि बेटी पैसा पति को नहीं दे, इससे समझ आता है पति और ससुराल वालों की असलियत क्या है।
मां ने यह भी कहा कि एक बार संतुष्ट होने के बाद वह बेटी से खुद पैसा लेना बंद कर देती। हां, वह उसके ससुराल बार-बार जाती है क्योंकि उसे बेटी की चिंता लगी रहती है। मामले में मां को समझाया है कि वह बेटी की जिंदगी में अनावश्यक हस्तक्षेप न करे। साथ ही एक माह मां को बेटी से नहीं मिलने की सलाह दी है। मां ने इसे माना है। मामले में मां- बेटी को एक माह बाद वापस बुलाया गया है।
मायके के दखल से परिवार टूटने की शिकायत नई नहीं है। हालांकि, शिकायत पतियों की तरफ से होती है। आंकड़ों की मानें तो हर माह डालसा और मीडिएशन सेंटर में दस से बारह मामले पहुंचते हैं।
बीते माह डालसा पहुंचे मामले में पति ने शिकायत कर बताया कि भाई और मां के उकसाने पर उसकी पत्नी मायके जा बैठी है और उसे छह माह के बच्चे से मिलने नहीं दे रही। पति ने कहा कि उसका साला और सास, चाहते हैं कि वह परिवार से अलग हो जाए, जबकि संयुक्त परिवार पत्नी को सपोर्ट करता है।
मीडिएशन सेंटर पहुंचे मामले में एक बुजुर्ग ने अपनी बहू को घर वापस लाने मदद मांगी। उसने कहा कि बहू के माता-पिता उसे भड़काते हैं। इससे बहू कुछ दिन ससुराल में ठीक रहती है फिर विवाद करने लगती है। इस बार विवाद में बेटे ने गुस्से में उसे घर से जाने कह दिया।