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फर्जी ड्रग्स केस मामले ने IPS सिस्टम को किया कटघरे में खड़ा, हाई कोर्ट से बरी हुए आरोपी, जवान, अफसरों की भूमिका पर उठे सवाल

फर्जी ड्रग्स केस मामले ने IPS सिस्टम को किया कटघरे में खड़ा, हाई कोर्ट से बरी हुए आरोपी, जवान, अफसरों की भूमिका पर उठे सवाल
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। फरवरी 2025 में इंदौर पुलिस द्वारा जिस ड्रग्स मामले को बड़ी कार्रवाई बताकर पेश किया गया था, वही केस अब पुलिस सिस्टम के लिए शर्मनाक उदाहरण बन गया है। हाई कोर्ट ने आजाद नगर थाना अपराध क्रमांक 124/2025 में दर्ज एनडीपीएस एक्ट का पूरा मामला खारिज करते हुए विजय पाटीदार, शाहनवाज और कांस्टेबल लखन गुप्ता को दोषमुक्त कर दिया। फैसले के साथ ही यह सवाल गूंज उठा कि क्या यह केस अपराध के खिलाफ कार्रवाई था या अफसरों द्वारा रची गई एक स्क्रिप्ट।

    इस पूरे प्रकरण की जांच तत्कालीन एसीपी करणदीप सिंह के नेतृत्व में की गई थी, जबकि पर्यवेक्षण तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा के पास था। उसी दौरान प्रशिक्षु आईपीएस आदित्य सिंघारिया को तेजाजी नगर थाने में पदस्थ किया गया था। आरोप है कि “बड़ा ड्रग्स केस” दिखाने की होड़ में जांच प्रक्रिया, साक्ष्य और कानूनी मर्यादाओं को दरकिनार कर दिया गया।

    (राजू बघेल, संजय मालाकार)

    शिकारी बना शिकार -

    मामले की शुरुआत आजाद नगर निवासी शाहरुख से जुड़े पारिवारिक विवाद से हुई। उसकी पत्नी नरगिस ने थाने से लेकर एसीपी और डीसीपी तक शिकायतें की थीं। इसी शिकायत को आधार बनाकर ड्रग्स केस की पटकथा तैयार की गई। 24 जनवरी को एसीपी करणदीप सिंह के निर्देश पर राजू बघेल, संजय मालाकार, प्रदीप पटेल और तेजाजी नगर थाने से अरुण गुरइया ने लोकेशन ट्रेस की। होटल रोज से शाहरुख की गिरफ्तारी के दौरान डीवीआर निकाल लिया गया, ताकि कोई इलेक्ट्रॉनिक सबूत न बचे।

    आरक्षक ने रचि साजिश -

    जब मंदसौर में ड्रग्स नहीं मिली, तो आरोप है कि इंदौर से 198 ग्राम कथित एमडी “अरेंज” की गई। 26 फरवरी को सब इंस्पेक्टर रवि बट्टी, एएसआई मनोज दुबे, प्रधान आरक्षक देवेंद्र परिहार, आरक्षक गोविंद, देवेंद्र राणा और अभिनव शर्मा ने रालामंडल क्षेत्र में बरामदगी दिखाई। इस केस में कांस्टेबल लखन गुप्ता को भी जानबूझकर फंसाया गया। आरोप है कि वारंट तामील को लेकर संजय मालाकार और राजू बघेल से विवाद के बाद लखन को निशाना बनाया गया और शाहरुख से उसके खिलाफ बयान दिलवाया गया।

    (यह लेब की रिपोट )

    एमडी नहीं थी निकला यूरिया- 

    27 जून 2025 को भोपाल की सीएफएसएल रिपोर्ट ने पूरे मामले की पोल खोल दी,जब्त की गई एमडी नहीं, बल्कि यूरिया (पोटेशियम नाइट्रेट) निकली। मंगलवार को हाई कोर्ट ने केस खारिज कर सभी को बरी कर दिया। अधिवक्ता नितिन पाराशर ने बताया कि अब इस कथित षड्यंत्र में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ क्षतिपूर्ति और दंडात्मक कार्रवाई के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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