नई दिल्ली। भारत का व्यापार घाटा जुलाई में बढ़कर 27.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो जून में 18.78 अरब डॉलर था। यह वृद्धि काफी तेज है और इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि देश के निर्यात में गिरावट आई है जबकि आयात में बढ़ोतरी हुई है। जुलाई में भारत का माल निर्यात 37.24 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 64.59 अरब डॉलर तक पहुंच गया। जून में यह आंकड़े क्रमश: 35.14 अरब डॉलर और 53.92 अरब डॉलर थे। इसका मतलब है कि भारत ने विदेशों से जितना सामान खरीदा, वह विदेशों को बेचे गए सामान की तुलना में कहीं ज्यादा था, जिससे व्यापार घाटा बढ़ गया। वर्ष-दर-वर्ष तुलना में जुलाई 2025 में आयात 8.6% ज्यादा रहा, जबकि निर्यात में 7.3% की वृद्धि हुई। हालांकि यह वृद्धि सकारात्मक दिखती है, लेकिन आयात की तेज गति ने घाटे को और बढ़ा दिया। अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि जुलाई का व्यापार घाटा लगभग 20.35 अरब डॉलर रहेगा, लेकिन यह उम्मीद से लगभग 7 अरब डॉलर ज्यादा निकला। यह बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि ज्यादा व्यापार घाटा मतलब है कि विदेशी मुद्रा का बहाव देश से बाहर तेजी से हो रहा है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है और चालू खाते का संतुलन बिगड़ सकता है।
इसके साथ ही एक और चिंता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्तावित 25% अतिरिक्त शुल्क है, जो भारतीय वस्तुओं पर 27 अगस्त से लागू हो सकता है, अगर दोनों देशों के बीच चल रही 21 दिन की वार्ता में कोई समझौता नहीं हुआ। यह शुल्क लागू होने पर भारतीय निर्यातकों पर बड़ा असर पड़ेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जो अमेरिका को निर्यात पर निर्भर हैं। इसके बावजूद अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच अमेरिका को भारतीय निर्यात 33.53 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि के 27.57 अरब डॉलर से काफी ज्यादा है। यह बताता है कि अमेरिका अभी भी भारत के लिए एक मजबूत निर्यात बाजार है, लेकिन बढ़ते शुल्क का खतरा इसे कमजोर कर सकता है। जून 2025 में व्यापार घाटा 18.78 अरब डॉलर था, जो मई के 21.88 अरब डॉलर से कम था। उस समय निर्यात लगभग स्थिर रहा था और आयात में गिरावट आई थी, जिससे घाटा कम हुआ था। लेकिन जुलाई में वैश्विक मांग के कुछ क्षेत्रों में सुधार के बावजूद कच्चे तेल, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आयात में उछाल आया, जिससे घाटा अचानक बढ़ गया।
देखा जाए तो भारत का जुलाई का व्यापार घाटा दोहरे दबाव में है—एक तरफ आयात का तेजी से बढ़ना और दूसरी तरफ संभावित अमेरिकी शुल्क का खतरा। अगर अमेरिकी शुल्क लागू हो जाते हैं तो आने वाले महीनों में निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे व्यापार घाटा और बढ़ेगा। सरकार को ऐसे हालात में निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं, आयात प्रतिस्थापन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर तेजी से काम करना होगा ताकि यह असंतुलन नियंत्रित हो सके और भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। कॉमर्स सेक्रेटरी सुनील बर्थवाल का कहना है, वैश्विक स्तर पर पॉलिसीज को लेकर अनिश्चित माहौल के बावजूद, जुलाई और वित्त वर्ष 2026 में अब तक भारत के सर्विसेज और मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में अब तक भारी बढ़ोतरी हुई है। यह ग्लोबल एक्सपोर्ट में हुई वृद्धि से कहीं अधिक है। बर्थवाल ने बताया कि जुलाई में माल निर्यात की अगुआई इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, दवा और फार्मा, आॅर्गेनिक और इनआॅर्गेनिक केमिकल्स, जेम्स एंड ज्वैलरी ने की।