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उमा भारती बोलीं-हिंदुओं की एकता जरूरी, अंतर जाति विवाह में कोई हर्ज नहीं

मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा है कि हिंदू एकता के लिए उठाए जा रहे कदम सराहनीय है। अगर हिंदुओं के बीच अंतर जाति विवाह होते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। मेरे परिवार में भी अंतर जाति विवाह हुए हैं।
उमा भारती बोलीं-हिंदुओं की एकता जरूरी, अंतर जाति विवाह में कोई हर्ज नहीं
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिंदू एकता, हिंदू राष्ट्र और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को आगे बढ़ाने की बात का समर्थन करते हुए कहा कि यह विचार बुंदेलखंड से ही उठता रहा है। उमा के अनुसार भारत मूल रूप से एक हिंदू राष्ट्र रहा है, और इसकी विशेषता ही यह है कि यहां सभी मतों को स्थान मिला है।  हिंदू समाज के भीतर एकता आवश्यक है, जिसके लिए जातिगत विभाजन खत्म होना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदू एकता को मजबूत करने के लिए जातियों के बीच रोटी-बेटी का संबंध बढ़ाना चाहिए, यानी अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने अपने परिवार में भी अंतरजातीय विवाह होने का उल्लेख किया।

    मैं हाशिए पर नहीं हूं

    उन्होंने गौ संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि गाय तभी बचेगी जब किसान और सरकार दोनों सक्रिय रूप से आगे आएंगे। उमा ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान और उन्होंने जो नीतियां बनाईं, वर्तमान में मुख्यमंत्री मोहन यादव को उन्हें और आगे बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही निजी क्षेत्र में भी आरक्षण पर विचार किया जाना चाहिए, और आर्थिक आधार पर आरक्षण की संभावना पर भी चर्चा आवश्यक है। उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर कहा कि मैं हाशिये पर नहीं हूं। मेरी भूमिका भी नहीं तलाश रही।

    मोहन सरकार की तीन चुनौतियां...

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उमा ने कहा कि वे दिखावा करने में माहिर हैं—कभी जनेऊधारी बन जाते हैं, तो गाय से जुड़े मुद्दे उभरें तो गोबर-गौमूत्र का इस्तेमाल करने का नाटक भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और खराब सड़कों की स्थिति चिंताजनक है, और आवश्यकता पड़े तो वे स्वयं भी आंदोलन में बैठने को तैयार हैं। उन्होंने मोहन सरकार की तीन प्रमुख चुनौतियां बताईं। इनमें निवेश को जमीन पर उतारना, शराबबंदी की प्रभावी नीति और भ्रष्टाचार पर कड़ा नियंत्रण होना चाहिए शामिल हैं।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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