सोहागपुर: तीसरे फेज की दुकानों की नीलामी पर घमासान, सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी जताया विरोध

सोहागपुर। विरोध कर रहे पार्षदों का मुख्य सवाल है कि पहले और दूसरे फेज की दुकानों से अब तक किराया और प्रीमियम राशि की पूरी वसूली नहीं हो सकी है, तो तीसरे फेज की नीलामी की जल्दबाजी क्यों की जा रही है। पार्षदों ने पुरानी नीलामी की प्रक्रिया और उससे जुड़े बकायों की समीक्षा की मांग की है। उनका आरोप है कि कई दुकानदारों ने प्रीमियम राशि जमा नहीं की, इसके बावजूद दुकानें संचालित हो रही हैं। करीब 36 दुकानों से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये किराया वसूला जाना था, लेकिन नियमित वसूली नहीं होने का आरोप है। पार्षदों का कहना है कि पहले पुराने बकाये की वसूली सुनिश्चित हो, इसके बाद नई नीलामी पर निर्णय लिया जाए।
तीसरे फेज की नीलामी पर सत्ता पक्ष में भी विरोध
नगर परिषद की बैठक में तीसरे फेज की दुकानों की नीलामी से संबंधित प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इसमें सत्ता पक्ष के तीन पार्षदों ने प्रस्ताव के विरोध में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि विरोध के बावजूद प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। वहीं विपक्ष के एक पार्षद द्वारा प्रस्ताव का समर्थन किए जाने से बैठक में राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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पुरानी दुकानों के बकाये पर उठे सवाल
विरोध कर रहे पार्षदों का कहना है कि पहले और दूसरे फेज की दुकानों से अब तक किराया और प्रीमियम राशि की पूरी वसूली नहीं हो सकी है। उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में दुकानदारों द्वारा प्रीमियम राशि जमा नहीं कराई गई है, इसके बावजूद दुकानें संचालित हो रही हैं। पार्षदों ने पुरानी नीलामी की जांच कर बकाया किराया और प्रीमियम राशि की वसूली सुनिश्चित करने, आवश्यकता पड़ने पर पूर्व की नीलामी निरस्त करने की मांग उठाई है।
धर्मदास वेलबंशी ने वसूली को लेकर उठाए सवाल
विरोधी पार्षदों की अगुवाई कर रहे पार्षद धर्मदास वेलबंशी का आरोप है कि करीब एक दशक पहले पहले फेज की दुकानों की नीलामी की गई थी, लेकिन कई दुकानों से आज तक अपेक्षित किराया वसूल नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कई दुकानदारों ने प्रीमियम राशि तक जमा नहीं की, इसके बावजूद दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर नगर परिषद की संपत्ति से निर्धारित राजस्व ही प्राप्त नहीं हो रहा है, तो नई दुकानों की नीलामी करने का औचित्य समझ से परे है।
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पहले पुराने बकाये की वसूली, फिर नई नीलामी
एक पार्षद पति ने आरोप लगाया कि करीब 36 दुकानों से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये किराया वसूला जाना था, लेकिन नियमित वसूली नहीं होने के कारण नगर परिषद को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विरोध कर रहे पार्षदों का यह भी आरोप है कि करीब 12 वर्षों से दुकानों का एक रुपया तक किराया वसूल नहीं किया गया, जबकि प्रीमियम राशि की वसूली भी अधूरी है। उनका कहना है कि नगर परिषद को पहले पुरानी संपत्तियों से बकाया किराया और प्रीमियम राशि वसूल करनी चाहिए। इसके बाद ही नई दुकानों की नीलामी पर निर्णय लिया जाना चाहिए। हालांकि तीसरे फेज की दुकानों की नीलामी का प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच सामने आया विरोध अब नगर की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में पुराने बकायों की वसूली, पूर्व नीलामी की वैधता और तीसरे फेज की नीलामी को लेकर विवाद और गहराने के आसार हैं। इस सिलसिले में जब नगर पंचायत के सीएमओ धर्मेन्द्र शर्मा से पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।





















