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मप्र हाईकोर्ट ने कहा-‘रिटायरमेंट के 7 साल बाद पेंशन से नहीं की जा सकती वसूली’, राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज  

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारियों की पेंशन से वसूली के मामले में राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि रिटायरमेंट के वर्षों बाद तृतीय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से वेतन विसंगति या तदर्थ वेतन वृद्धि के आधार पर वसूली नहीं की जा सकती। दोनों कर्मचारी 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे।
मप्र हाईकोर्ट ने कहा-‘रिटायरमेंट के 7 साल बाद पेंशन से नहीं की जा सकती वसूली’, राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज   
फाइल फोटो

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पेंशन में से की जा रही वसूली के मामले में सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की दो पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करके कहा है कि रिटायरमेंट के वर्षों बाद तृतीय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से वेतन विसंगति या तदर्थ वृद्धि के नाम पर वसूली नहीं की जा सकती।  

2025 के फैसलों पर पुनर्विचार के लिए दाखिल की थी याचिकाएं

राज्य सरकार की ओर से दाखिल इन पुनर्विचार याचिकाओं में रामराव भीमटे और रामायण सिंह तिवारी के पक्ष में 23 जुलाई 2025 को पारित फैसलों पर फिर से विचार करने की राहत चाही गई थी। दोनों ही कर्मचारी पुलिस विभाग से सब इंस्पेक्टर (एम) पद से वर्ष 2017 में रिटायर हुए थे। सेवानिवृत्ति के 7 साल बाद 26 सितंबर 2024 को डीआईजी भोपाल द्वारा सेवाकाल के दौरान दी गई तदर्थ वेतन वृद्धि को त्रुटिपूर्ण बताते हुए दोनों कर्मचारियों की पेंशन से वसूली का आदेश जारी किया गया। पहले सिंगल बेंच और फिर डिवीजन बेंच से कर्मचारियों के पक्ष में आदेश पारित हुआ।

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सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है हस्तक्षेप से इनकार

इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की, लेकिन वहां पर 1 दिसंबर 2025 को हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट में यह पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता अतुल कुमार राय ने दलीलें रखीं। मामले पर पुनर्विचार से इनकार करके डिवीजन बेंच ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।

अधिग्रहित की गई अधिक जमीन का भी दो मुआवजा

शहडोल जिले में अधिसूचित से अधिक जमीन का अधिग्रहण करने के मामले का हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने एनएचएआई और मप्र सड़क विकास निगम को कहा है कि वे 30 दिन के भीतर नया नोटिफिकेशन जारी करके याचिकाकर्ता को मुआवजे का भुगतान करें।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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