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मैं सिर झुकाकर माफी मांगता हूं… छत्रपति शिवाजी महाराज का स्टैच्यू गिरने पर बोले PM मोदी

पालघर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के तटीय सिंधुदुर्ग जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिरने को लेकर भारत के इस वीर सपूत के साथ ही, इस घटना से आहत लोगों से भी शुक्रवार को माफी मांगी। बता दें कि मोदी ने पिछले साल दिसंबर में सिंधुदुर्ग जिले में नौसेना दिवस समारोह के दौरान प्रतिमा का अनावरण किया था। प्रतिमा का उद्देश्य समुद्री रक्षा के प्रति छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का सम्मान करना था।

तस्वीर दिसंबर 2023 की है, जब PM मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का उद्घाटन किया था।

हमारे लिए छत्रपति शिवाजी महाराज आराध्य देव – PM

महाराष्ट्र के पालघर जिले में 76,000 करोड़ रुपए की लागत वाली वधावन बंदरगाह परियोजना की आधारशिला रखने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज… मेरे लिए सिर्फ नाम नहीं हैं, हमारे लिए छत्रपति शिवाजी महाराज आराध्य देव हैं। पिछले दिनों सिंधुदुर्ग में जो हुआ, आज मैं सिर झुकाकर मेरे आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज जी के चरणों में मस्तक रखकर माफी मांगता हूं।

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘‘हमारे संस्कार अलग हैं। हम वह लोग नहीं हैं जो आए दिन भारत मां के महान सपूत, इसी धरती के लाल वीर सावरकर को अनाप-शनाप गालियां देते रहते हैं, अपमानित करते रहते हैं, देशभक्तों की भावनाओं को कुचलते हैं।” उन्होंने कहा कि वे लोग वीर सावरकर को गालियां देने के बाद भी माफी मांगने को तैयार नहीं हैं और ना ही उनको कोई पश्चाताप होता है।

विपक्षी दलों पर पीएम मोदी ने साधा निशाना

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र की जनता उनके संस्कार को अब जान गई है।” उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही मैं यहां उतरा, मैंने सबसे पहले शिवाजी से प्रतिमा गिरने की घटना के लिए माफी मांगी। मैं उन लोगों से भी माफी मांगता हूं जो इससे आहत हुए हैं।”

क्या है पालघर का वधावन बंदरगाह प्रोजेक्ट ?

पालघर में पीएम मोदी ने सिडको ग्राउंड में 76 हजार करोड़ के कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इसमें वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट भी शामिल है। बता दें कि पालघर जिले के दहानू शहर के पास स्थित वधावन बंदरगाह भारत के सबसे बड़े गहरे पानी के बंदरगाहों में से एक है। यह अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों को सीधा संपर्क प्रदान करेगा, जिससे पारगमन समय और लागत कम होगी। एक बार चालू होने के बाद, यह बंदरगाह भारत की समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा और वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लगभग 360 करोड़ रुपए की लागत से पोत संचार और सहायता प्रणाली के नेशनल रोल आउट की शुरुआत भी की। इस परियोजना के तहत, 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मशीनीकृत और मोटर चालित मछली पकड़ने वाले जहाजों पर चरणबद्ध तरीके से एक लाख ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे।

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