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नई दिल्ली। देश में इस साल त्योहारी सीजन में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इस खरीदारी ने खुदरा बाजार को नई ऊर्जा दी है और अर्थव्यवस्था में उत्साह भर दिया। सितंबर 22 से अक्टूबर 21 के बीच यानी नवरात्रि से लेकर दीवाली तक देशभर में बिक्री 6 लाख करोड़ (करीब 67.6 अरब डॉलर) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। कन्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतीया ने बताया कि इस दौरान सबसे ज्यादा मांग ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, फर्निशिंग और मिठाइयों की रही। यह उछाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सितंबर में लागू की गई व्यापक जीएसटी कटौती का सीधा परिणाम है, जिसने उपभोक्ताओं को बड़े पैमाने पर खरीदारी के लिए प्रेरित किया।
अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के बाद घरेलू मांग पर जो दबाव आया था, वह इस टैक्स रियायत से काफी हद तक दूर हो गया। मोदी सरकार ने 22 सितंबर को करीब 400 उत्पाद श्रेणियों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) घटाया था, जिससे वस्तुएं सस्ती हुईं और उपभोग बढ़ा। इसका सबसे बड़ा असर आॅटोमोबाइल क्षेत्र में देखा गया, जहां मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। यह लगभग एक दशक में पहली बड़ी टैक्स कटौती थी, जिसने वाहनों को सस्ता बनाकर मांग को नया बल दिया।
धनतेरस के अवसर पर हुंडई मोटर इंडिया की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़ी, जबकि टाटा मोटर्स ने नवरात्रि से धनतेरस के बीच एक लाख से अधिक वाहन डिलीवर किए। महिंद्रा ने ट्रैक्टर बिक्री में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसका श्रेय अच्छे मानसून और ग्रामीण आय में सुधार को जाता है। मारुति सुजुकी की बुकिंग इतनी तेज बढ़ी कि कंपनी को रविवार को भी उत्पादन जारी रखना पड़ा। इसके छोटे मॉडल जैसे आॅल्टो, एस-प्रेसो, वैगनआर और सेलेरियो की मांग इतनी अधिक रही कि शोरूम में ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई। कंपनी के एक अधिकारी ने मजाक में कहा कि ह्लअब हमारे डीलर दोपहिया ग्राहकों द्वारा छोड़े गए हेलमेट गिन रहे हैं, जो कारों में अपग्रेड कर रहे हैं।
वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भी उछाल देखने को मिला। कोटक महिंद्रा बैंक और एसबीआई कार्ड्स जैसी कंपनियों ने त्योहारी खरीदारी के दौरान विभिन्न श्रेणियों में खर्च में तेजी दर्ज की। घरेलू उपकरण निमार्ता क्रॉम्पटन ग्रीव्स के सीएफओ कलीश्वरन ए. ने बताया कि रसोई उपकरणों विशेष रूप से प्रेशर कुकर जैसी वस्तुओं की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, टैक्स कटौती के कारण कुछ व्यवसायों की सप्लाई चेन में अस्थायी बाधाएं आईं। कई कंपनियों ने पुराने दामों पर स्टॉक बेचने के लिए जल्दीबाजी की, और ग्राहकों ने बड़े उत्पादों की खरीद अगस्त से टालकर सितंबर के अंत तक रोक रखी, जब नई कम दरें लागू हुईं। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि बिक्री में आई यह तेजी कुछ हद तक पेंट-अप डिमांड यानी पूर्व में टली हुई मांग के कारण भी है।
नोमुरा के अनुसार, इस प्रभाव को पूरी तरह समझने के लिए दिसंबर-जनवरी के बिक्री आंकड़ों पर नजर रखनी होगी। बैंक आॅफ अमेरिका सिक्योरिटीज की रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक दबाव कुछ कम हुए हैं, लेकिन आय में धीमी वृद्धि, कमजोर रोजगार बाजार और घटती संपत्ति की भावना अभी भी उपभोक्ता विश्वास पर असर डाल रही है। इसके बावजूद कंपनियों का रुख सकारात्मक है। माना जा रहा है कि बिक्री में दिख रही यह तेजी जनवरी के बाद भी जारी रह सकती है। रियल एस्टेट, तार और केबल जैसे क्षेत्रों में सुधार से घर-गृहस्थी की खरीदारी की भावना में मजबूती आई है। साफ है कि भारत में उपभोग फिर से गति पकड़ रहा है और टैक्स कटौती ने इसे और आगे बढ़ाने का काम किया है।