Shivani Gupta
31 Jan 2026
पौष मास की ठंडी सुबह, दीपक की लौ और तुलसी की खुशबू यहीं से शुरू होता है सफला एकादशी का वो दिन, जिसे शास्त्रों में सफलता का प्रवेश द्वार माना गया है। हिंदू धर्म में सफला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। यह एकादशी हर साल पौष मास के कृष्ण पक्ष में आती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता आती है। मान्यता है कि सफला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।
इस वर्ष सफला एकादशी 15 दिसंबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। वहीं, साल की अंतिम एकादशी यानी पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर को पड़ेगी। इन दोनों दिनों में माता तुलसी से जुड़े कुछ उपाय करने से विशेष लाभ मिलता है।
पौष मास को हिंदू पंचांग में बहुत शुभ माना गया है। इस महीने में सूर्य देव और माता तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है। तुलसी की उपासना से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मानसिक शांति बनी रहती है। माना जाता है कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ दिनों में तुलसी तोड़ना वर्जित होता है। इन दिनों तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए-
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को मखाने की खीर का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। खीर में चीनी की जगह गुड़ का उपयोग करें। मखाना कमल से जुड़ा होता है, जो माता लक्ष्मी को प्रिय है। इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सफलता आती है।