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Budget 2026 :बदल दिए नियम, अब नहीं होगी जेल, सिर्फ जुर्माना से चल जाएगा काम

केंद्रीय बजट में इनकम टैक्स को लेकर किए गए एक प्रावधान से अब टैक्स छिपाने वाले को जेल नहीं होगी। अब इसके लिए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
बदल दिए नियम, अब नहीं होगी जेल, सिर्फ जुर्माना से चल जाएगा काम
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। बजट 2026 में भले ही मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स स्लैब में बड़ी राहत नहीं मिली, लेकिन सरकार ने टैक्स व्यवस्था की आत्मा को बदलने वाला कदम जरूर उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार ऐसे सुधारों की घोषणा की है, जो सीधे-सीधे करदाताओं के मन से डर निकालने पर केंद्रित हैं। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि टैक्स कानून अब सजा देने का नहीं, बल्कि भरोसे पर चलने वाला सिस्टम बनेगा।

    टैक्स कानून अपराध नहीं, भरोसे का ढांचा 

    सरकार ने ट्रस्ट बेस्ड टैक्सेशन के अपने विजन को आगे बढ़ाते हुए टैक्स से जुड़े कई प्रावधानों को आपराधिक श्रेणी से बाहर कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब आयकर कानून को उल्लंघन करने पर हर मामले में अपराधी की तरह नहीं देखा जाएगा। यह फैसला उन लाखों ईमानदार करदाताओं के लिए बड़ी राहत है, जो जटिल नियमों की वजह से अनजाने में गलती कर बैठते थे और जेल की आशंका से डरते रहते थे।

    तकनीकी चूक पर अब जेल नहीं 

    अब तक अकाउंट ऑडिट में देरी, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट समय पर दाखिल न कर पाना या दस्तावेजों में छोटी गलती जैसी बातों पर भी आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान था। बजट 2026 में इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी तकनीकी या प्रक्रियागत गलतियों को अब अपराध नहीं माना जाएगा। इन मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक जुर्माने के जरिए निपटारा किया जाएगा। इससे ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी।

    अपील नियमों में नरमी, राहत का दायरा बढ़ा

    कर विवादों को कम करने और अदालतों पर बोझ घटाने के लिए अपील प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। अब करदाता को अपील दाखिल करते समय विवादित कर राशि का 20% नहीं, सिर्फ 10% अग्रिम जमा करना होगा। इसके साथ ही एक और अहम राहत यह है कि अपील की अवधि के दौरान दंड राशि पर कोई ब्याज नहीं लगेगा। यह बदलाव उन करदाताओं के लिए खास है, जिनके मामले वर्षों तक लंबित रहते हैं। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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