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Bhishma Dwadashi 2026 :28 या 29 जनवरी... कब है भीष्म द्वादशी? पितृ तर्पण का विशेष दिन, जानें क्यों है खास

भीष्म द्वादशी 29 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन भीष्म पितामह के निर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है और पितृ तर्पण, श्राद्ध व दान-पुण्य के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन पूजा और तर्पण करने से पितृ दोष का निवारण होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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28 या 29 जनवरी... कब है भीष्म द्वादशी? पितृ तर्पण का विशेष दिन, जानें क्यों है खास
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में भीष्म पितामह लगभग 58 दिनों तक बाणों की शय्या पर लेटे रहे थे। उन्हें इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन, सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने प्राण त्यागे थे। उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी, जिसे भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

    इसके चार दिन बाद, माघ शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि को उनका पूर्ण निर्वाण हुआ था। इसी कारण इस दिन को भीष्म द्वादशी कहा जाता है और यह दिन विशेष पूजा के लिए समर्पित होता है।

    भीष्म द्वादशी कब है?

    उदयातिथि के अनुसार, भीष्म द्वादशी 29 जनवरी 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।

    पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 29 जनवरी 2026 (गुरुवार) दोपहर 01:55 बजे से 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार) सुबह 11:09 बजे तक रहेगी।

    द्वादशी पारण समय - 07:10 ए एम से 09:20 ए एम (पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।)

    यह दिन भीष्म पितामह की स्मृति को समर्पित होता है और श्राद्ध, तर्पण और पितृ पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

    जानें शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त - 05:25 ए एम से 06:18 ए एम

    प्रातः सन्ध्या - 05:52 ए एम से 07:11 ए एम

    अभिजित मुहूर्त - 12:13 पी एम से 12:56 पी एम

    विजय मुहूर्त - 02:22 पी एम से 03:05 पी एम

    गोधूलि मुहूर्त - 05:55 पी एम से 06:22 पी एम

    सायाह्न सन्ध्या - 05:58 पी एम से 07:17 पी एम

    अमृत काल - 09:26 पी एम से 10:54 पी एम

    निशिता मुहूर्त - 12:08 ए एम, जनवरी 30 से 01:01 ए एम, 30 जनवरी

    रवि योग - 07:11 ए एम से 07:31 ए एम

    भीष्म द्वादशी का महत्व

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भीष्म पितामह का निर्वाण हुआ था, इसलिए इसे भीष्म निर्वाण द्वादशी भी कहा जाता है। यह दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिएस तर्पण और श्राद्ध के लिए, दान-पुण्य के लिए, पितृ दोष निवारण के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्मों से व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है।

    भीष्म द्वादशी पूजा विधि

    • भीष्म द्वादशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
    • भगवान विष्णु और भीष्म पितामह की पूजा करें।
    • भगवान विष्णु और भीष्म पितामह की प्रतिमा स्थापित करें।
    • घी का दीपक जलाएं।
    • तिल, गुड़, पंचामृत, फूल, धूप, दीप और फल अर्पित करें।
    • विष्णु मंत्रों का जाप करें।
    • पवित्र नदी में स्नान करें।
    • पितरों का तर्पण करें।

    इस दिन तर्पण और पूजा करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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