Shivani Gupta
29 Jan 2026
Shivani Gupta
22 Jan 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन देवी-देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इसी दिन से कल्पवास की शुरुआत भी होती है।
पूर्णिमा तिथि शुरू: 1 फरवरी 2026, सुबह 5:52 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 फरवरी 2026, रात 3:38 बजे
शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा व्रत 1 फरवरी 2026 को ही रखा जाएगा। इसी दिन स्नान-दान और पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
पूर्णिमा उपवास के दिन चन्द्रोदय - 05:26 PM
ब्रह्म मुहूर्त - 05:24 ए एम से 06:17 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 05:50 ए एम से 07:09 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:23 पी एम से 03:07 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 05:58 पी एम से 06:24 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 06:00 पी एम से 07:19 पी एम
अमृत काल - 05:59 पी एम से 07:29 पी एम
निशिता मुहूर्त - 12:08 ए एम, फरवरी 02 से 01:01 ए एम, 02 फरवरी
रवि पुष्य योग - 07:09 ए एम से 11:58 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग - 07:09 ए एम से 11:58 पी एम
माघ पूर्णिमा के दिन स्नान करने से पुण्य, शांति, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है और मन व शरीर दोनों शुद्ध होते हैं।
इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। जैसे- फल, दूध, खीर, सूखे मेवे, शकरकंद, सिंघाड़े के व्यंजन, सेंधा नमक से बना भोजन। तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित होता है।
इस दिन दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है-
इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन लाभ के योग बनते हैं।
माघ पूर्णिमा को देवताओं की विशेष कृपा का दिन माना जाता है। इस दिन किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना फल देता है। कल्पवास करने वालों के लिए यह दिन बहुत पवित्र और विशेष होता है।